All amendments in Indian Constitution PDF | भारतीय संविधान में किये गए प्रमुख संशोधन

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं ऐसे अभ्यर्थी जो भारतीय संविधान की सामान्य ज्ञान की जानकारी चाहते हैं ऐसे अभ्यर्थियों के लिए हमारे इस पोस्ट में भारतीय संविधान के संशोधन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी All amendments in Indian Constitution PDF | भारतीय संविधान में किये गए प्रमुख संशोधन दिया गया है यह संशोधन महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, एसएससी ,रेलवे परीक्षा इत्यादि परीक्षाओं में यह प्रश्न पूछे जाते हैं

All amendments in Indian Constitution PDF
All amendments in Indian Constitution PDF | भारतीय संविधान में किये गए प्रमुख संशोधन

भारतीय संविधान दुनिया के सबसे बड़े संविधान में से एक से भारतीय संविधान की तुलना दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण संविधान में की जाती है क्योंकि भारतीय संविधान अलग-अलग देशों से यह संविधान है जिसके कारण यह अत्यंत महत्वपूर्ण हैं लेकिन इसके विपरीत भारतीय संविधान में बहुत सारे संशोधन हुए हैं इन संशोधन की जानकारी हमारे इस पोस्ट में आपको जानकारी मिल जाएगी

All amendments in Indian Constitution PDF | भारतीय संविधान में किये गए प्रमुख संशोधन

भारतीय संविधान प्रमुख संशोधन

पहला संशोधन (1951 ई०):-इसके माध्यम से स्वतंत्रता और समानता एवं संपत्ति से संबंधित मौलिक अधिकारों को लागू किए जाने संबंधी कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया गया। भाषण एवं अभिव्यक्ति के मूल अधिकारों पर इसमें उचित प्रतिबंध की व्यवस्था की गई। साथ ही, संशोधन द्वारा संविधान में नौवीं अनुसूची को जोड़ा गया, जिसमें उल्लिखित कानूनों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्तियां के अंतर्गत परीक्षण नहीं की जा सकती है।

दूसरा संशोधन (1952 ई०):-  इसके अंतर्गत 1951 ई० की जनगणना के आधार पर लोकसभा में प्रतिनिधित्व को पुनः व्यवस्थित किया गया।

तीसरा संशोधन (1954 ई०) :-  इसके अंतर्गत सातवीं अनुसूची को समवर्ती सूची की 33 वी प्रविष्टि के स्थान पर खदान, पशुओं के लिए चारा, कच्चा का कपास को जूट आदि को रखा गया , जिसके उत्पादन एवं आपूर्ति को लोकहित में समझने पर सरकार उस पर नियंत्रण लगा सकती है।

चौथा संशोधन (1955 ई.) :- इसके अंतर्गत व्यक्तिगत संपत्ति को लोकहित में राज्य द्वारा  हस्तगत किए जाने की स्थिति में, न्यायालय इसकी क्षतिपूर्ति के संबंध में परीक्षा नहीं कर सकती।

छठा संशोधन (1956ई०):-  इस संशोधन द्वारा सातवीं अनुसूची के संघ सूची में परिवर्तन कर अंतर राज्य बिक्री  कर के अंतर्गत कुछ वस्तुओं पर केंद्र को कर लगाने का अधिकार दिया गया है।

सातवा संशोधन (1956 ई०) :-  इस संशोधन द्वारा भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया, जिसमें पहले के तीन श्रेणियों में राज्यों के वर्गीकरण को समाप्त करते हुए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में उन्हें विभाजित किया गया। साथ ही, इनके अनुरूप केंद्र एवं राज्य की विधान पालिकाओं में सीटों को पुनः व्यवस्थित किया गया।

आठवां संशोधन (1959 ई०) :-  इसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्यों के निम्न शब्दों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य भारतीय समुदायों के आरक्षण संबंधी प्रावधानों को 10 वर्षों के लिए अर्थात 1970 ई० तक बढ़ा दिया गया।

नौवां संशोधन (1960 ई०) :-  इसके द्वारा संविधान की प्रथम अनुसूची में परिवर्तन करके भारत और पाकिस्तान के बीच 1958 की संधि की शर्तों के अनुसार बेरुबारी, खुलना आदि क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिए गए।

दसवां संशोधन (1961ई०) :-  इसके अंतर्गत भूतपूर्व पुर्तगाली अंतः क्षेत्रों दादर एवं नगर हवेली को भारत में शामिल कर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया।

ग्यारहवॉ संशोधन (1961ई०):-  इसके अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के प्रावधानों में परिवर्तन कर, इस संदर्भ में दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को बुलाया गया। साथ ही यह भी निर्धारित किया गया कि निर्वाचन मंडल में पद की अधिकता के आधार पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन को चुनौती नहीं दी जा सकती।

बारहवां संशोधन (1965ई०):-  इसके अंतर्गत संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन कर गोवा, दमन एवं दीव को भारत में केंद्र शासित प्रदेश के रूप में शामिल कर लिया गया।

तेरहवाँ संशोधन ( 1962ई०):-  इसके अंतर्गत नागालैंड के संबंध में विशेष प्रावधान अपना कर उसे एक राज्य का दर्जा दे दिया गया।

चौदहवां संशोधन( 1963ई०):-  इसके द्वारा केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुदुचेरी को भारत में शामिल किया गया। साथ ही कॉमर्स के द्वारा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा गोवा, दमन और दीव तथा पुदुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों में विधान पालिका एवं मंत्री परिषद की स्थापना की गई।

पंदहवा संशोधन (1963ई०):-  इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़कर 65 कर दी गई तथा अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों की उच्च न्यायालय में नियुक्ति के संबंध प्रावधान बनाया गया ।

सोलहवा संशोधन( 1963ई०):-  इसके द्वारा देश में  संप्रभुता एवं अखंडता के हित में मूल अधिकारों पर कुछ प्रतिबंध लगाने के प्रावधान रखे गए। साथ ही तीसरी अनुसूची में भी परिवर्तन कर सपथ ग्रहण के अंतर्गत ‘मैं भारत की स्वतंत्रता एवं अखंडता को बनाए रखूंगा’ जोड़ा गया।

सत्रहवा संशोधन (1964ई०):-  इसमें संपत्ति के अधिकारों में और भी संशोधन करते हुए कुछ अन्य भूमि सुधार प्रावधानों को नौवीं अनुसूची में रखा गया, जिनकी वैधता की परीक्षा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती थी।

अठारहवां संशोधन (1966ई०):-  इसके अंतर्गत पंजाब का भाषाई आधार पर पुनर्गठन करते हुए पंजाबी भाषी क्षेत्र को पंजाब एवं हिंदी भाषी क्षेत्र को हरियाणा के रूप में गठित किया गया। पर्वती क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को दे दिए गए तथा चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।

उन्नीसवाँ संशोधन (1966ई०):-  इसके अंतर्गत चुनाव आयोग के अधिकारों में परिवर्तन किया गया एवं उच्च न्यायालयों  को चुनाव याचिकाएं सुनने का अधिकार दिया गया।

बीसवॉ संशोधन (1966ई०):-  इसके अंतर्गत अनियमितता के आधार पर नियुक्त कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति को वैधता प्रदान की गई।

इक्कीसवां संशोधन (1967ई०):-  इसके द्वारा सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची के अंतर्गत  पंदरहवी भाषा के रूप में शामिल किया गया।

बाईसवॉ संशोधन( 1969ई०):-  इसके द्वारा असम से अलग करके एक नया राज्य मेघालय बनाया गया।

तेईसवा संशोधन ( 1969ई०):- इसके अंतर्गत विधान पालिका में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण एवं आंवले भारतीय समुदाय के लोगों का मनोनयन और 10 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया।

चौबीसवाँ संशोधन (1971 ई०) :-  इस संशोधन के अंतर्गत संसद की इस शक्ति को स्पष्ट किया गया है कि वह संविधान के किसी भी भाग को, जिसमें भाग 3 के अंतर्गत आने वाले मूल अधिकार भी है, संशोधित कर सकती है। साथ ही, यह भी निर्धारित किया गया कि संशोधन संबंधी विधेयक जब दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति के समक्ष जाएगा तो इस पर राष्ट्रपति द्वारा सम्मती दिया जाना बाध्यकारी होगा।

छब्बीसवॉ संशोधन (1971 ई०):- इसके अंतर्गत भूतपूर्व देसी राज्यों के शासकों की विशेष उपाधियां एवं उनके प्रिवी -पर्स को समाप्त कर दिया गया।

सत्ताईसवॉ संसोधन (1971ई०):-  इसके अंतर्गत मिजोरम एवं अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में स्थापित किया गया।

भारतीय संविधान के अन्य संशोधन

उनतीसवॉ संशोधन (1972 ई०) :-  इसके अंतर्गत केरल भू -सुधार (संशोधन) अधिनियम 1969 तथा केरल भू -सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1971 को संविधान की नौवीं अनुसूची में रख दिया गया कॉमन जिससे इस की संवैधानिक वैधता को न्यायालय में चुनौती न दी जा सके।

इकतीसवॉ संशोधन (1973 ई०):-  इसके द्वारा लोकसभा के सदस्यों की संख्या 525 से 545 कर दी गई तथा केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व 25 से घटाकर 20 कर दिया गया।

बत्तीसवॉ संशोधन (1974ई०):-  इसके द्वारा संसद एवं विधान पालिकाओं के सदस्यों द्वारा दबाव में या जबरदस्ती किए जाने पर इस्तीफा देना अवैध घोषित किया गया एवं अध्यक्ष को यह अधिकार दिया गया कि वह सिर्फ शिक्षा से दिए गए एवं उचित त्यागपत्र को ही स्वीकार करें।

चौतीसवॉ संशोधन (1974 ई०) :-  इसके अंतर्गत विभिन्न राज्यों द्वारा पारित बीस भू-सुधार अधिनियम को नवीस अनुसूची में प्रवेश देते हुए उन्हें न्यायालय द्वारा संवैधानिक वैधता के परीक्षण से मुक्त किया गया।

पैतीसवॉ संशोधन (1974ई०):-  इसके अंतर्गत सिक्किम का संरक्षित राज्य का दर्जा समाप्त कर उसे संबंध राज्य के रूप में भारत में प्रवेश किया गया।

छत्तीसवॉ संशोधन (1975ई०):-  इसके तहत आपात स्थिति की घोषणा और राष्ट्रपति कॉमन राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक प्रधानों द्वारा अध्यादेश जारी किए जाने को अविवादित मनाते हुए न्यायिक पुनर्विचार से उन्हें मुक्त रखा गया।

उनतालीसवॉ संशोधन (1975ई०):-  इसके द्वारा राष्ट्रपति कॉम उपराष्ट्रपति पूर्व प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष के निर्वाचन संबंधी विवादों को न्यायिक परीक्षण से मुक्त कर दिया गया।

इकतालीसवॉ संशोधन (1976ई०):-  इसके द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की सेवा मुक्ति की आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 65 कर दी गई, पर संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की सेवानिवृत्ति की अधिकतम आयु 65 वर्ष रहने दी गई।

बयालीसवॉ संशोधन (1976ई०):-  इसके द्वारा संविधान में व्यापक परिवर्तन लाए गए, जिनमें से मुख्य निम्नलिखित थे-( क) संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष एवं एकता और अखंडता आदि शब्द जोड़े गए।
(ख)  सभी नीति निर्देशक सिद्धांतों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्चता सुनिश्चित की गई।
(ग)  इसके अंतर्गत संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य को अनुच्छेद 51 (क)के अंतर्गत जोड़ा गया।
(घ)  इसके द्वारा संविधान को न्यायिक परीक्षण से मुक्त किया गया।
(ड) सभी विधानसभा एवं लोकसभा की सीटों की संख्या को इस शताब्दी के अंत तक के लिए  स्थिर कर दिया गया।
(च)  लोकसभा एवं विधानसभा ओं की अवधि को 5 से 6 वर्ष कर दिया गया।
(छ)  इसके द्वारा यह निर्धारित किया गया कि किसी केंद्रीय कानून की वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय एवं राज्य के कानून की वैधता का उच्च न्यायालय ही परीक्षण करेगा। साथ ही, यह भी निर्धारित किया गया कि किसी संवैधानिक वैधता के पैसों पर 5 से अधिक न्यायाधीशों की बेंच द्वारा दो तिहाई बहुमत से मिला दिया जाना चाहिए और यदि न्यायाधीशों की संख्या 5 तक हो तो निर्णय सर्वसम्मति से होना चाहिए।

(ज)  इसके द्वारा वन- संपदा, शिक्षा, जनसंख्या- नियंत्रण आदि विषयों को राज्य सूची समवर्ती सूची के अंतर्गत कर दिया गया।
(झ)  इसके अंतर्गत निर्धारित किया गया कि राष्ट्रपति मंत्री परिषद एवं उसके प्रमुख प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार कार्य करेगा।
(ट)  इसमें संसद को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए कानून बनाने के अधिकारी एवं सर्वोच्चता स्थापित की।

चौवालीसवॉ संशोधन (1978 ई०) :-  इसके अंतर्गत राष्ट्रीय आपात स्थिति लागू करने के लिए ‘आंतरिक अशांति’ के स्थान पर ‘सैन्य विद्रोह’ का आधार रखा गया एवं आपात स्थिति संबंधी अन्य  प्रधानों में परिवर्तन लाया गया, जिससे उनका दुरुपयोग ना हो। इसके द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों के भाग से हटाकर  विधिक (कानूनी) अधिकारों की शेरनी में रख दिया गया। लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि 6 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई। उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद को हल करने की अधिकारिता प्रदान की गई।

पचासवाँ संशोधन (1984ई०):-  इसके द्वारा अनुच्छेद 33 में संशोधन कर सैन्य सेवाओं की पूरक सेवाओं में कार्य करने वालों के लिए आवश्यक सूचनाएं एकत्रित करने, देश की संपत्ति की रक्षा करने और कानून तथा व्यवस्था संबंधित दायित्व भी दिए गए। साथ ही कॉम इन सेवाओं द्वारा उचित का कर्तव्य -पालन हेतु संसद को कानून बनाने के अधिकार भी दिए गए।

बावनवॉ संशोधन (1950 ई०) :-  इस संशोधन के द्वारा राजनीतिक दल बदल पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखा गया। इसके अंतर्गत संसद या विधान मंडलों के उन सदस्यों को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा, जो उस दल को छोड़ते हैं  जिसके चुनाव- चिन्ह पर उन्होंने चुनाव लड़ा था, पर यदि किसी दल की संसदीय पार्टी के एक तिहाई सदस्य अलग दल बनाना चाहते हैं तो उन पर अयोग्यता लागू नहीं होगी। दल -बदल विरोधी इन प्रावधानों को संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत रखा गया।

तिरपनवॉ संशोधन (1986ई०):-  इसके अंतर्गत अनुच्छेद 371 में खंड ‘जी’ जोड़कर मिजोरम का राज्य दर्जा दिया गया।

चौवनवॉ संशोधन (1986ई०):-  इसके द्वारा संविधान की दूसरी अनुसूची के भाग ‘डी’ में संशोधन कर न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि का अधिकार संसद को दिया गया।

पचपनवॉ संशोधन (1986 ई०) :-  इसके अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश को राज्य बनाया गया।

छपपनवॉ संशोधन (1987 ई०) :- इसके अंतर्गत गोवा को एक राज्य का दर्जा दिया गया तथा दमन और दीव को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में ही रहने दिया गया।

सत्तावनवॉ  संशोधन (1987 ई०) :-  इसके अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण के संबंध में मेघालय, मिजोरम, नागालैंड एवं अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा सीटों का परिसीमन इस शताब्दी के अंत तक के लिए किया गया।

अट्ठावनवॉ  संशोधन (1987ई०) :-  इसके द्वारा राष्ट्रपति को संविधान का प्रमाणिक हिंदी संस्करण प्रकाशित करने के लिए अधिकृत किया गया।

साठवॉ संशोधन (1988 ई०):-  इसके अंतर्गत व्यवसाय कर की सीमा 250 रुपए से बढ़ाकर 2500  रुपए प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष कर दी गई।

इकसठवॉ संशोधन (1989 ई०):-  इसके द्वारा मतदान के लिए आयु – सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 लेने का प्रस्ताव था।

पैसठवॉ संशोधन (1990 ई०) :-  इसके द्वारा अनुच्छेद 338 में संशोधन करके अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग के गठन की व्यवस्था की गई।

उनहत्तरवां संशोधन (1991 ई०) :-  दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनाया गया तथा दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के लिए विधानसभा और मंत्रिपरिषद का उपबंध किया गया।

सत्तरवाँ संशोधन (1992 ई०) :-  दिल्ली और पुडुचेरी संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को राष्ट्रपति के लिए निर्वाचक मंडल में सम्मिलित किया गया।

इकहत्तरवां संशोधन (1991 ई०) :-  आठवीं अनुसूची में कोकर्णी ,मणिपुरी और नेपाली भाषा को सम्मिलित किया गया।

तिहत्तरवॉ संशोधन (1993 – 93 ई०) :-  इसके अंतर्गत संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके पंचायतीराज संबंधी प्रावधानों को सम्मिलित किया गया। इस संशोधन के द्वारा संविधान में भाग- 9 जोड़ा गया। इसमें अनु 243और 243 क से 243 ण  अंत तक अनुच्छेद है।

चौहत्तरवॉ संशोधन (1993ई०):-  इसके अंतर्गत सविधान में 12वीं अनुसूची शामिल की गई, जिसमें नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषदों से संबंधित प्रावधान किए गए। संसोधन के द्वारा संविधान में भाग -9 क जोड़ा गया। इसमें अनुच्छेद 243 से अनुच्छेद 243 यद तक के अनुच्छेद हैं।

छिहत्तरवॉ संशोधन (1994ई०):-  इस संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान की नौवीं अनुसूची में संशोधन किया गया है और तमिलनाडु सरकार द्वारा पारित पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में 69  प्रतिशत आरक्षण का उपबंध करने वाली अधिनियम को नौवीं अनुसूची में शामिल कर दिया गया।

अठहत्तरवाॉ संशोधन( 1995 ई०) :- इसके द्वारा नौवीं अनुसूची में विभिन्न राज्यों द्वारा पारित 27 भूमि सुधार विधियों को समाविष्ट किया गया। इस प्रकार नौवीं अनुसूची में सम्मिलित अधिनियम की कुल संख्या 284 हो गई है।

उननासीवॉ संशोधन (1999 ई) :-  अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि 25 जनवरी 2010 ई० तक के लिए बढ़ा दी गई है। इस संशोधन के माध्यम से व्यवस्था की गई कि अब राज्यों को प्रत्यक्ष केंद्रीय करो से प्राप्त कुछ धनराशि का 29% हिस्सा मिलेगा।

बेरासीवॉ संशोधन (2000 ई०) :-  इस संशोधन के द्वारा राज्यों को सरकारी नौकरियों में आरक्षित रिक्त स्थानों की भर्ती हेतु प्रोन्नति के मामलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम प्राप्त अंकों में छूट प्रदान करने की अनुमति प्रदान की गई।

तिरासीवॉ संशोधन (2000 ई०) :-  इस संशोधन द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान न करने की छूट प्रदान की गई उन्हें ग्राम अरुणाचल प्रदेश में कोई भी अनुसूचित जाति न होने के कारण उसे यह छूट प्रदान की गई।

चौरासीवॉ संशोधन (2001 ई०) :-  संशोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा तथा विधानसभाओं की सीटों की संख्या में वर्ष 2026 तक कोई परिवर्तन ना करने का प्रावधान किया गया है।

पचासीवॉ संशोधन (2001ईट) :-  सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति /जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था।

छियासीवॉ संशोधन (2002ई०):-  संशोधन अधिनियम द्वारा देश के 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने संबंधी प्रावधान किया गया है, अनुच्छेद 21 (क) के अंतर्गत संविधान में जोड़ा गया है, इस अधिनियम द्वारा संविधान के अनुच्छेद 45 तथा अनुच्छेद 51 (क )में शामिल संशोधन किए जाने का प्रावधान है।

सतासीवॉ संशोधन (2003 ई०) :-  परिसीमन में जनसंख्या का आधार 1991 की जनगणना के स्थान पर 2001 पर दी गई है।

अट्ठासीवॉ  संशोधन(2003 ई०):- सेवाओं पर कर का प्रावधान।

नवासीवॉ  संशोधन(2003 ई०) :- अनुसूचित जनजाति के लिए पृथक राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की   व्यवस्था।

नबबेवॉ संशोधन (2300ई०):-  असम विधानसभा में अनुसूचित जनजाति और गैर अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व बरकरार रखते हुए बोडोलैंड, टेरिटोरियल काउंसिल क्षेत्र, गैर -जनजाति के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा।

इक्यावनवेवॉ संशोधन( 2003 ई०):-  दल-बदल व्यवस्था में संशोधन, केवल संपूर्ण दल के विलय को मान्यता, केंद्र तथा राज्य में मंत्री परिषद के सदस्य संख्या क्रमशः लोकसभा तथा विधानसभा की सदस्य संख्या का 15% होगा (जहां सदन की सदस्य संख्या 40 -40 है वहां अधिकतम 12 होगी)।

बेरानवेवॉ संशोधन (2003 ई.):-  संविधान की आठवीं अनुसूची में बोटो, डोंगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं का समावेश।

तिरानवेवॉ संशोधन (2006 ई०):-  शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के नागरिकों के  दाखिले के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था व्यवस्था, संविधान के अनुच्छेद 15 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत की गई है।

चौरानवेवॉ संशोधन (2006ई०):-  संशोधन द्वारा बिहार राज्य को एक जनजाति कल्याण मंत्री नियुक्त करने के उत्तरदायित्व से मुक्त कर दिया गया तथा इस प्रावधान को झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्य में लागू करने की व्यवस्था की गई। मध्य प्रदेश एवं उड़ीसा राज्य में यह प्रावधान पहले से ही लागू है।

पंचानवेवॉ संशोधन (2009 ई०):-  इस संशोधन द्वारा अनुच्छेद -334 में संशोधन पर लोकसभा में अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण मांग लो भारतीयों को मनोनीत करने संबंधी प्रावधान को 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया।

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