अनुच्छेद 370 नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019

  • अनुच्छेद 370
  • अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर के राजा हरी सिंह पहले स्वतंत्र रहना चाहते थे पाकिस्तानी सैनिकों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें भारत की जरूरत महसूस हुई थी
  • राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर किया था यह तब चलन में आया जब भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 में ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान में विभाजन किया गया
  • इसमें शामिल विषयों पर एक केंद्रीय कानून का विस्तार करने के लिए राज्य सरकार के साथ केवल परामर्श की जरूरत होती है तथा अन्य मामलों के लिए राज्य सरकार की सहमति जरूरी है
  • 1947 में जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 का मसौदा तैयार किया था
  • 17 अक्टूबर 1949 को भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 शामिल किया गया था
  • संविधान के भाग 21 के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला था राज्यसभा में पेश किया
  • राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370 {1}  शक्तियों का प्रयोग का संविधान आदेश जारी किया आदेश सविधान 1954 का अधिग्रहण  करेगा
  • अनुच्छेद 370 के प्रमुख बातें
  • अनुच्छेद 370 के प्रमुख बातें अनुच्छेद 370 सावधान में अस्थाई प्रावधान के तौर पर शामिल हुआ
  • जम्मू एवं कश्मीर का अपना स्वयं का संविधान था जम्मू कश्मीर पर भारत के संविधान का भाग 6 लागू नहीं था जिसमें राज्य सरकार से संबंधित प्रावधान है
  • संसद द्वारा बनाए गए प्रतिबंधित निरोध संबंधी विधियां राज्यों में लागू नहीं होती
  • राज्य के नीति निर्देशक तत्व और मूल कर्तव्यों के प्रावधान राज्य पर लागू नहीं होते मूल अधिकार को अपवादों एवं शर्तों के साथ राज्य पर लागू संपत्ति का मूल अधिकार राज्य में लागू
  • राष्ट्रपति को राज्य में वित्तीय आपात घोषित करने का अधिकार नहीं था आंतरिक असंतुलन की स्थिति में घोषित आपातकाल राज्य की सहमति के बिना लागू नहीं हो सकता
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 CAB राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी के मंजूरी के पश्चात 12 दिसंबर 2019 से कानून बन चुका है
  • नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 लाया गया जो कि इस प्रकार पारित हुआ   
वोटलोकसभा 09 -12 -2019राज्यसभा  11 -12 -2019
AYES311125             
NOES80105
ABST0000
TOTAL391230
  • क्या था नागरिकता अधिनियम 1955
  • कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक निम्न आधारों पर बन सकता है जन्म वंश पंजीकरण देसी करण एवं भू अर्जन द्वारा
  • परंतु गैरकानूनी रूप से आए व्यक्तियों को नागरिकता नहीं दी गई थी गैर कानूनी विस्थापित से तात्पर्य है वह जो कानूनी दस्तावेजों के बिना आए हैं यह जो कानूनी दस्तावेजों के साथ आए परंतु समय सीमा से अधिक निवासरत हैं
  • समीकरण के तहत कोई व्यक्ति यदि लगातार 1 साल रहता है तथा पिछले 14 साल में से 11 साल भारत में रहा है तो उसे नागरिकता प्रदान की जाएगी
  • नागरिकता अधिनियम 1955 में इसके पूर्व 5 बार 1986 1992 2003 2005 और 2015 संशोधन हो चुका है
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के तहत मुख्य बदलाव अफगानिस्तान पाकिस्तान एवं बांग्लादेश के अल्पसंख्यक जो अपने धर्म के कारण प्रताड़ित किए जा रहे हैं उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी
  • इसमें उल्लेखित अल्पसंख्यक हिंदू बौद्ध पारसी जैन सिख ईसाई धर्म से संबंधित है
  • 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी अल्पसंख्यकों को देसी करण द्वारा भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी इसी तिथि के पश्चात से नागरिकता प्राप्त करने के लिए आए प्रवासियों को 6 साल की अवधि पूर्ण करनी होगी जो पहले 11 वर्ष थी तत्पश्चात उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त होगी
  • ऐसे प्रवासियों के अवैध प्रवेश के आरोप में चल रही वैध कार्रवाई खत्म करके उसे नागरिकता दी जाएगी
  • अपवाद
  • अपवाद उत्तर पूर्वी राज्यों के संस्कृति भाषा एवं जनसंख्या विषय परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए इन राज्यों के क्षेत्रों में प्रवासियों के नागरिकता पर रोक लगाया गया है ताकि इनकी स्वायत्तता बची रह सके यह राज्य हैं पहला छठवीं अनुसूची में शामिल विशेष राज्य असम मेघालय त्रिपुरा एवं मिजोरम
  • दूसरा इनर लाइन परमिट प्राप्त राज्य अरुणाचल प्रदेश मिजोरम एवं नागालैंड मणिपुर राज्य को ना ही छठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है ना ही इसे इधर लाइट परमिट का दर्जा प्राप्त है अतः राज्य अपवाद में शामिल नहीं है
  • क्या है इनर लाइट परमिट
  • इनर लाइन परमिट ईस्टर्न फ्रंटियर विनियम 1873 के अंतर्गत जारी किया जाने वाला एक ट्रेवल डॉक्यूमेंट है भारत में भारतीय नागरिकों के लिए बने इनर लाइन परमिट के इस नियम को ब्रिटिश सरकार ने बनाया था बाद में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात समय समय पर फेरबदल कर इसे जारी रखा गया यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है पर्यटन की दृष्टि से बनाया जाने वाला एक अल्पकालिक इनर लाइन परमिट नौकरी रोजगार के लिए अन्य राज्यों के नागरिकों के लिए बनाया जाने वाला इनर लाइन परमिट

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