Computer Basic Knowledge in Hindi | कंप्यूटर क्या है 

Computer Basic Knowledge in Hindi प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं ऐसे अभ्यर्थी जो कंप्यूटर विषय की तैयारी कर रहे हैं बेसिक कंप्यूटर क्या है ऐसे अभ्यर्थियों के लिए हमारे इस पोस्ट में कंप्यूटर से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर की जानकारी दी जा रही है यह प्रश्न उत्तर संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा, रेलवे परीक्षा ,कर्मचारी चयन आयोग, व्यापम परीक्षा ,पटवारी परीक्षा ,इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं कंप्यूटर क्या है कंप्यूटर के गुण तथा सीमाएं लिखिए इसलिए यह प्रश्न उत्तर बहुत ही महत्वपूर्ण है।

Computer Basic Knowledge in Hindi
Computer Basic Knowledge in Hindi | कंप्यूटर क्या है

Computer Basic Knowledge in Hindi

संपूर्ण भारत में ऐसे उम्मीदवार जो नौकरी की तलाश कर रहे हैं Computer basic knowledge PDF उनके लिए हिंदी ,अंग्रेजी, व्याकरण ,गणित ,रिजनिंग, कंप्यूटर एवं इतिहास की जानकारी के अलावा कंप्यूटर विषय में जीके से संबंधित अध्ययन करना भी जरूरी होता है Computer basic Knowledge questions and answers इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने कंप्यूटर के लिए विशेष रूप से हमारे विशेषज्ञों द्वारा तैयार की हुई है Introduction to computer basics जिनके जानकारी नीचे विस्तार से दी हुई है इन कंप्यूटर प्रश्नों का आंसर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में एवं सरकारी नौकरियों के लिए समय-समय पर पूछे जाते हैं।

कंप्यूटर क्या है

कंप्यूटर का अर्थ

Computer एक ऐसा Electronic Device है जो User द्वारा Input किये गए Data में प्रक्रिया करके सूचनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं, कंप्यूटर का अर्थ अर्थात् Computer एक Electronic Machine है जो User द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती हैं| इसमें डेटा को स्टोर, पुनर्प्राप्त और प्रोसेस करने की क्षमता होती है। आप दस्तावेजों को टाइप करने, ईमेल भेजने, गेम खेलने और वेब ब्राउज़ करने के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर सकते हैं। आप स्प्रैडशीट्स, प्रस्तुतियों और यहां तक ​​कि वीडियो बनाने के लिए इसका उपयोग भी कर सकते हैं। 

आसान भाषा में Computer, यूजर द्वारा दिए गए निर्देशों (Instructions) के आधार पर प्रोसेसिंग करके परिणाम उत्पन्न करता है। इसके अलावा Computer की स्टोरेज डिवाइस में डेटा को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है, ताकि दुबारा जरूरत पड़ते ही उसे प्राप्त किया जा सके।

शब्द Computer इंग्लिश शब्द ‘Compute’ से लिया गया है, जिसका हिंदी मतलब है ― गणना करना। आज से कई सौ सालों पहले यह शब्द उस व्यक्ति के लिये उपयोग किया जाता था, जो गणना करते थे (अर्थात गणितज्ञ थे)। जब यही काम बाद में Computer करने लगे तो उन्हें गणकयंत्र (Calculating Machine) कहा जाने लगा।

  • चार्ल्स का डिफरेन्स इंजिन- 1822 में इस इंजिन का आविष्कार कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के गणित के प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज ने किया था। इससे बीजगणितीय फलन व व्यंजक (Algebraic Expressions) आसानी से हल किए जा सकते थे।
    इस मशीन द्वारा 20 अंकों तक सही हल निकाला जा सकता था।मशीन डिफरेंस की उपयोगिता से प्रोत्साहित होकर बैबेज ने विश्लेषणात्मक इंजन (Analytical Engine) के विकास के लिए अध्ययन व शोध किया।

  • इस इंजन का प्रोटोटाइप बना लेने के बावजूद बैबेज का कार्य कुछ तत्कालीन तकनीकी अवयवों की कमी के कारण पूरा नहीं हो पाया। बैवेज के द्वारा प्रयुक्त मॉडल के आधार पर ही
    कंप्यूटर का पहला प्रोटोटाइप मॉडल तैयार किया गया था, जो आज के आधुनिक कंप्यूटर का आधार है।
    इसीलिए बैबेज को आधुनिक कंप्यूटर का निर्माता या जनक (Father of Computer) कहते हैं।

कंप्यूटर की सरंचना- संगठन (Orgnisation of Computer)

कंप्यूटर की सरंचना (Orgnisation of Computer in Hindi) एक जैसी ही होती हैं चाहे वह बड़ा कंप्यूटर हो या छोटा।
प्रत्येक कंप्यूटर पांच भाग होते हैं :-

(i) निवेश या इनपुट ईकाई (Input Unit)
(ii) स्मृति (Memory)
(iii) गणितीय एवं तार्किक ईकाई (ALU)
(IV) कण्ट्रोल यूनिट (Control Unit)
(V) निर्गत या आउटपुट ईकाई (Output Unit)

(1) केंद्रीय संसाधन ईकाई (CPU) :-

कंप्यूटर की सिस्टम यूनिट में मुख्य हार्डवेयर CPU होता है। सिस्टम यूनिट एक बॉक्स होता है जिसमे CPU के अलावा कंप्यूटर की अन्य डिवाइसेज एवं परिपथ बोर्ड होते हैं
जो एक मुख्य परिपथ बोर्ड ‘मदर बोर्ड’ पर संयोजित रहते हैं। इस प्रकार कंप्यूटर का अधिकाश परिपथ सिस्टम यूनिट होता है।

CPU को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता हैं।

नियंत्रण ईकाई (Control Unit)

यह यूनिट हार्डवेयर की क्रियाओं को संचालित एवं नियंत्रित करती हैं।

इनपुट युक्तियां (Input Devices)

कंप्यूटर में आंकड़ों एवं सूचनाओं एवं अन्य निर्देशों को पहुंचाने वाले उपकरणों (Devices) को इनपुट डिवाइस कहते हैं।

आउटपुट ईकाई (output Devices)

कंप्यूटर में एक बार डाटा प्रक्रिया करने के बाद प्रयोगक्रता उसके उपयुक्त परिणाम प्राप्त करना चाहता हैं। कंप्यूटर द्वारा संसाधित आंकड़ों के परिणाम कंप्यूटर जिन यंत्रों द्वारा प्रदान किए जाते हैं
वे यंत्र कंप्यूटर के निर्गम यंत्र (Output Devices) कहलाते हैं।

कंप्यूटर के प्रकार/वर्गीकरण (Types of Computer In Hindi)

कंप्यूटर अपने आकार, काम करने की क्षमता और और निर्माण तकनीक के अनुसार अलग-अलग प्रकार के होते हैं, कंप्यूटर के प्रकार को समझने के लिए हम कंप्यूटर को हम तीन प्रकार में वर्गीकृत कर सकते हैं.

  1. अनुप्रयोग (Application)
  2. उद्देश्य (Objective)
  3. आकार (Size)

1. अनुप्रयोग (Application) –

अनुप्रयोग के आधार पर बने हुए कंप्यूटरों को भी अलग-अलग प्रकार में बांटा गया है अनुप्रयोग के आधार पर कंप्यूटरों को तीन प्रकार में बांटा गया है.

  • एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computers)
  • डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computers)
  • हायब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computers)

एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computers) –

एनालॉग कंप्यूटर ऐसे कंप्यूटर होते हैं जो भौतिक मात्राएं जैसे कि, दाब (Presure), तापमान, लंबाई को माफ कर उनके परिणामों को अंको के रूप में प्रदर्शित करते हैं, एनालॉग कंप्यूटर उन समस्याओं के निकटतम उत्तर प्रदर्शित करते हैं जिनको डिफरेंशियल समीकरण से दर्शाया जा सकता है, एनालॉग कंप्यूटर राशि का परिमाप तुलना के आधार पर करते हैं.

एक थर्मामीटर कोई भी गणना नहीं करता है परंतु यह है पारे के संबंधित प्रसार की तुलना करके शरीर के तापमान को मापता है, इसी तरह से एक पेट्रोल पंप मैं लगा हुआ एनालॉग कंप्यूटर पेट्रोल पंप से निकले हुए पेट्रोल की मात्रा को मापता है और लीटर में प्रदर्शित करता है उसके मूल्य की गणना करके स्क्रीन पर दिखाता है.

एनालॉग कंप्यूटर मुख्य रूप से वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षेत्र में उपयोग किया जाते हैं क्योंकि क्षेत्रों में मात्राओं का अधिकतम यूज़ होता है, एनालॉग कंप्यूटर केवल अनुमानित माप निकालते हैं, 

डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computers) –

डिजिटल कंप्यूटर ऐसे कंप्यूटर होते हैं जो अपना कार्य अंकों के आधार पर करते हैं, सामान्यतः कंप्यूटर का तात्पर्य डिजिटल कंप्यूटर से ही होता है. वर्तमान में जितने भी कंप्यूटर उपलब्ध है लगभग सभी कंप्यूटर डिजिटल कंप्यूटर ही होते हैं.

डिजिटल कंप्यूटर डाटा तथा प्रोग्राम को बायनरी डाटा 0 और 1 में परिवर्तित करके उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप में ले आते हैं.

हायब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computers) –

हायब्रिड कंप्यूटर ऐसे कंप्यूटर होते हैं जो अलग-अलग गुण धर्म के कार्य करने में सक्षम होते हैं, ऐसे कंप्यूटर जिनमें एनालॉग कंप्यूटर और डिजिटल कंप्यूटर दोनों के गुण मौजूद होते हैं हायब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computers) कहलाते हैं.

हायब्रिड कंप्यूटर का एनालॉग डिवाइस किसी रोगी के लक्षण जैसे कि तापमान, रक्तचाप आदि को मापता है और फिर यह परिमाप बाद में डिजिटल भाग के द्वारा अंको में बदले जाते हैं और इस प्रकार रोगी के स्वास्थ्य में आए उतार-चढ़ाव को तत्काल प्रेक्षण किया जा सकता है.

2. उद्देश्य (Objective) –

उद्देश्य के अनुसार कंप्यूटरों के दो प्रकार होते हैं.

  • सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर (General Purpose Computers) 
  • विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर (Special Purpose Computers)

सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर (General Purpose Computers) –

सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर ऐसे कंप्यूटर होते हैं जिनमें अनेक काम करने की क्षमता होती है, जैसे कि वर्ड प्रोसेसिंग से पत्र तथा दस्तावेज तैयार करना, दस्तावेजों को छापना, संगीत सुनना, प्रोग्राम तथा ग्राफिक्स को चलाना, स्प्रेडशीट तैयार करना, इंटरनेट से कनेक्ट होना आदि कार्यों को संपन्न करते हैं. सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर में लगे हुए सीपीयू (CPU) की कार्य करने की क्षमता सीमित होती है.

विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर (Special Purpose Computers) –

विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर यह ऐसे कंप्यूटर होते हैं जिन्हें किसी विशेष कार्य करने के लिए बनाया जाता है इन कंप्यूटरों में लगे सीपीयू (CPU) की छमता उस कार्य के अनुसार तय होती है, इन कंप्यूटर को विशेष रूप से तैयार किया जाता है यदि इनमें अनेक सीपीयू (CPU) की आवश्यकता होती है तो इनकी संरचना अनेक सीपीयू वाली कर देते हैं.

उदाहरण के लिए संगीत संपादित करने हेतु किसी संगीत स्टूडियो में लगा हुआ कंप्यूटर एक विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर होगा, जिसमें संगीत से संबंधित उपकरणों को जोड़ा जाएगा और संगीत को अलग-अलग प्रभाव देकर संपादन किया जाएगा. फिल्म उद्योग में भी फिल्म संपादन के लिए विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है, टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग में भी विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर के द्वारा वर्चुअल स्टूडियो के सेट तैयार किए जाते हैं और इसके अलावा भी विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोगी है जैसे कि –

  • अंतरिक्ष विज्ञान 
  • मौसम विज्ञान
  • युद्धक विमान का संचालन 
  • उपग्रह का संचालन
  • चिकित्सा 
  • भौतिक तथा रासायनिक विज्ञान में शोध 
  • कृषि विज्ञान 
  • इंजीनियरिंग 

3. आकार (Size) –

आकार के आधार पर कंप्यूटर को मुख्यतः 5 भागों में बांटा गया है.

  • माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computers)
  • वर्कस्टेशन (Workstation)
  • मिनी कंप्यूटर (Mini Computers)
  • मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computers)
  • सुपर कंप्यूटर (Super Computers)
माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computers) –

सन् 1970 के दशक में माइक्रोप्रोसेसर का आविष्कार हुआ था, और माइक्रोप्रोसेसर का यूज करके बनाए गए कंप्यूटर को माइक्रो कंप्यूटर कहा जाता है, माइक्रोप्रोसेसर के आविष्कार के बाद माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करके बनाए गए कंप्यूटर गति में तीव्र तथा आकार में छोटे होते थे और किसी के इस्तेमाल से सस्ती कंप्यूटर प्रणाली बनाना भी संभव हो पाया

माइक्रो कंप्यूटर को एक डेस्क में रख सकते हैं या फिर एक ब्रीफकेस में भी रखे जा सकते हैं, और यही छोटे कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर कहलाए माइक्रो कंप्यूटर कीमत में सस्ते और आकार में छोटे होते हैं, माइक्रो कंप्यूटर को पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computers) या पीसी (PC) भी कहते हैं. 

माइक्रो कंप्यूटर घरों में विद्यालयों की कक्षाओं तथा कार्यालय में प्रयुक्त किए गए, घरों में माइक्रो कंप्यूटर घर का खर्चा का ब्यौरा रखते हैं तथा मनोरंजन के साधन के रूप में काम आते हैं, विद्यालय में माइक्रो कंप्यूटर का यूज छात्रों की उपस्थिति पत्रक तैयार करने में, प्रश्न पत्र तैयार करने में, डाटा शीट बनाने में, मार्कशीट बनाने में और अलग-अलग विषयों की शिक्षा प्रदान करने के लिए उपयोग में आते हैं.

व्यापार के क्षेत्र में माइक्रो कंप्यूटर का एक व्यापक उपयोग है, व्यवसाय छोटा हो या फिर बड़ा दोनों ही व्यवसाय में माइक्रो कंप्यूटर उपयोगी है, माइक्रो कंप्यूटर का उपयोग करके बहुत ही आसानी से वर्ड प्रोसेसिंग, पत्र लेखन, प्रोजेक्टिंग, प्रस्तुतीकरण, प्रबंधन इन सभी कामों को संभालना आसान हो जाता है

माइक्रो कंप्यूटर में एक ही सीपीयू लगा होता है परंतु वर्तमान समय में माइक्रो कंप्यूटर का विकास तेजी से हो रहा है और इसके परिणामस्वरूप कई सीपीयू युक्त माइक्रो कंप्यूटर भी उपलब्ध है. आज के समय में 15 हजार से लेकर 75 हजार रुपए तक की कीमत में माइक्रो कंप्यूटर उपलब्ध है.

वर्कस्टेशन (Workstation) –वर्कस्टेशन आकार में माइक्रो कंप्यूटर के साइज के ही होते हैं परंतु वर्कस्टेशन अधिक शक्तिशाली होते हैं तथा यह विशेष रूप से जटिल कार्यों के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं. वर्कस्टेशन जैसे कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर के समान ही होते हैं किंतु इनकी कार्यक्षमता मिनी कंप्यूटर के जैसी होती है. यह कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर से महंगे होते हैं तथा इनका उपयोग वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा अन्य विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रयोजनों के लिए किया जाता है.

वर्कस्टेशन कंप्यूटर का उपयोग कंप्यूटरीकृत डिजाइन तथा ग्राफिक्स प्रभाव पैदा करने वाले कंप्यूटरों के रूप में किया जाता है, माइक्रो कंप्यूटर में अत्यधिक बदलाव तथा अधिक विकास के बाद अब वर्कस्टेशन का प्रचलन बहुत कम हो गया है तथा माइक्रो कंप्यूटर के उन्नत उत्पादन ने इसका स्थान ले लिया है अब माइक्रोकंप्यूटर भी उन्नत ग्राफिक्स तथा संचार क्षमताओं के साथ बाजार में उपलब्ध हो रहे हैं.

मिनी कंप्यूटर (Mini Computers) –मिनी कंप्यूटर का उपयोग मध्यम आकार के व्यवसायिक तथा इंजीनियरिंग संस्थानों में होता है, यह कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में अधिक शक्तिशाली होते हैं और यह कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर से भी ज्यादा महंगे होते हैं.

मिनी कंप्यूटर की कीमत माइक्रो कंप्यूटर से ज्यादा होती है इसीलिए यह व्यक्तिगत रूप से नहीं खरीदे जाते हैं मिनी कंप्यूटर को छोटी या मध्यम स्तर की कंपनियां काम में लेती है. मिमिनी कंप्यूटर में टर्मिनल जोड़कर एक ही समय में 1 से अधिक व्यक्ति काम कर सकते हैं और इन कंप्यूटर में एक से अधिक सीपीयू हो सकते हैं तथा इन कंप्यूटर की मेमोरी और गति माइक्रो कंप्यूटर से अधिक होती है.

मध्यम स्तर की कंपनी के लिए मिनी कंप्यूटर ही उपयोगी माने जाते हैं, कंपनी में हर व्यक्ति के लिए एक माइक्रो कंप्यूटर लगाना भी संभव है परंतु यह मिनी कंप्यूटर से भी महंगा पड़ जाएगा और इसके अलावा रखरखाव तथा मरम्मत की समस्या भी बढ़ जाएगी, इसीलिए मध्यम स्तर की कंपनियों में मिनी कंप्यूटर ही मुख्य केंद्रीय कंप्यूटर के रूप में कार्य करता है छोटे तथा मध्यम व्यवसायों में मिनी कंप्यूटर के द्वारा यह सब कार्य किए जाते हैं.

  • संस्थागत रिसोर्स प्लैनिंग
  • वित्तीय खातों का रखरखाव
  • कर्मचारियों के वेतन पत्र तैयार करना 
  • बिक्री विश्लेषण 
  • उत्पादन योजना 
  • यातायात में यात्रियों के लिए आरक्षण प्रणाली 
  • बैंकों में बैंकिंग के कार्य.
मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computers) –

मेनफ्रेम कंप्यूटर का आकार बहुत बड़ा होता है और साथ ही इनकी संग्रह क्षमता अधिक होती है, यह कंप्यूटर अधिक मात्रा के डाटा (DATA) को अधिक तेजी से प्रोसेस कर सकते हैं, इसीलिए इन कंप्यूटरों का उपयोग बड़ी कंपनियां, बैंक तथा सरकारी विभाग एक केंद्रीय कंप्यूटर के रूप में करते हैं. मेनफ्रेम कंप्यूटर 24 घंटे लगातार काम कर सकते हैं और इन पर एक साथ सैकड़ों यूजर कार्य कर सकते हैं. अत्यधिक डाटा को स्टोर करने के लिए इनमें नेटवर्क स्टोरेज सिस्टम का प्रयोग किया जाता है.

सुपर कंप्यूटर (Super Computer) –किसी भी समय सर्वाधिक गति से सर्वाधिक क्षमता वाले कंप्यूटरों को सुपर कंप्यूटर कहा जाता है, सुपर कंप्यूटर कंप्यूटर की सभी श्रेणियों में सबसे बड़े, सबसे अधिक संग्रहण क्षमता वाले तथा सबसे अधिक गति वाले होते हैं. 

विश्व का सबसे पहला सुपर कंप्यूटर इल्लीआक 4 था जिसने 1975 से काम करना शुरू किया था, इस पहले सुपर कंप्यूटर को डेनियल सलोटनिक बनाया था, यह सुपर कंप्यूटर एक बार में ही 64 कंप्यूटरों का काम कर लेता था 

सुपर कंप्यूटर में समानता अनेक सीपीयू समांतर क्रम में कार्य करते हैं इस प्रक्रिया को समांतर प्रक्रिया (Parellel Processing) कहते हैं. इनकी गति मिलियन फ्लोटिंग पॉइंट ऑपरेशंस प्रति सेकंड तथा गीगाफ्लॉप्स (GigaFlops) में मापी जाती है. सुपरकंप्यूटर ‘नॉन वॉन न्यूमान सिद्धांत’ पर कार्य करते हैं सुपर कंप्यूटर का उपयोग बड़ी वैज्ञानिक तथा शोध प्रयोगशाला में शोध तथा खोज, मौसम की भविष्यवाणी, अंतरिक्ष यात्रा संबंधित अनुसंधान व विकास, उच्च गुणवत्ता वाले एनिमेशन तथा चलचित्र का निर्माण आदि कार्यों में किया जाता है इन सभी कार्यों में सुपर कंप्यूटर के द्वारा की जाने वाली गणनाए उच्च कोटि की शुद्धता वाली होती है.


कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer in Hindi)

  • 1969 ई. में अमेरिका के रक्षा विभाग के वैज्ञानिकों ने शोध विभिन्न कंप्यूटरों को आपस में जोड़ने का अार्पानेट (ARPANET) कंप्यूटर नेटवर्क विकसित किया। यह पैकेट स्विचिंग तकनीक पर आधारित विश्व का पहला कंप्यूटर नेटवर्क था। इसीबाद में इंटरनेट (Internet) विकसित हुआ।
  • 1971 में इंटेल कम्पनी के वैज्ञानिक डॉ. टेड हॉफ ने विश्व का पहला व्यापारिक माइक्रोप्रसेसर ‘इंटेल 4004’ बनाया, जिसके फलस्वरूप चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर्स का अस्तित्व प्रकट हुआ।
  • 1973 में जीरॉक्स कम्पनी ने पहला मिनी कंप्यूटर जीराक्स आल्टो (Xerox Alto) बनाया। इसमें हाई रेजोल्यूशन स्क्रीन एवं बड़ी आंतरिक व बाह्य मेमोरी का प्रयोग हुआ जो आगे चलकर पर्सनल कंप्यूटर का आधार बना।
  • वर्ष 1976 में एप्पल कम्पनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स एवं स्टीव वॉजनायेक ने पहला पर्सनल कंप्यूटर (PC) निमित्त किया। इससे पर्सनल कंप्यूटरों (PC,s) का युग प्रारंभ हुआ।
  • 1980 ई. में बिलगेट्स (माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के सह-संस्थापक) ने पर्सनल कंप्यूटर्स के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System), एम.एस. डॉस (MS-DOS) का विकास किया।
  • आईबी.एम. कार्पोरेशन ने अपना पहला पर्सनल कंप्यूटर बाजार में उतारा। छोटे आकार, कम कीमत और अधिक क्षमता के कारण यह व्यापारिक दृष्टि से क्रांतिकारी सिद्ध हुआ। इसके बाद कंप्यूटर बनाने की होड़ प्रारम्भ हो गयी।
  • 1984 ई. में एप्पल कम्पनी ने मैकिण्टोष नामक पर्सनल कंप्यूटर बाजार में उतारा, जिसमें पहली बार ग्राफीकल यूजर इंटरफेस और माउस का उपयोग किया गया था।

    • 1988 ई. में इंटेल ने इंटेल 486 नामक माइक्रोप्रोसेसर बनाया, जिसमें 10 लाख ट्रांजिस्टर लगे थे।यह एक 32 बिट माइक्रोप्रोसेसर था।
  • 1991 ई. में वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web-www) के उपयोग के नियम बनाये गये, जिनके कारण सूचनाओं को इंटरनेट पर डालने और उससे प्राप्त करने की मानक विधियाँ बनीं। इससे इंटरनेट के व्यापक उपयोग और खुल गया।
  • चहुंमुखी विस्तार का मार्ग 1992 ई. में माइक्रोसॉफ्ट ने ग्राफिकल यूजर इंटरफेस पर आधारित अपने ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज 3.1 को बाजार में उतारा। यह बहुत सफल रहा और ऐसे अनेक ऑपरेटिंग सिस्टमों के विकास का आधार बना। इसके बाद क्रमशः विंडोज 95, विंडोज 98 व अन्य नवीनतम वर्जन विकसित किये गये।

कम्प्यूटर का विकास (Development of Computer)

कम्प्यूटर का विकास (Development of Computer) वैज्ञानिकों के निरन्तर चल रहे प्रयासों का परिणाम है। वैज्ञानिकों का उद्देश्य कम्प्यूटर को अधिक उपयोगी, सुविधाजनक, सस्ता, छोटा, तीव्र गति से कार्य करने वाला एवं अधिक विश्वसनीय बनाना रहा है। इसी उद्देश्य के मद्देनजर कम्प्यूटर में निरन्तर सुधार होता जा रहा है।

द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के बाद कम्प्यूटर का विकास तेजी से हुआ तथा इनके आकार-प्रकार में भी कई परिवर्तन हुए। आधुनिक कम्प्यूटर के विकास के इतिहास को तकनीकी विकास के आधार पर कई भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations) कहा जाता है। अभी तक कम्प्यूटर की पाँच पीढ़ियाँ अस्तित्व में आ चुकी हैं। प्रत्येक पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषताएँ और उनका संक्षिप्त परिचय निम्न प्रकार है

कंप्यूटर की पीढ़िया (Computer Generations)

1. प्रथम पीढ़ी (First Generation of Computer) 1942-55 :-

प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में निर्वात् नलिकाएँ या निर्वात वाल्व (Vacuum Tubes or Vacuum Valves) उपयोग में लाए जाते थे। जैसे- पिक्चर ट्यूब वाले टेलिविजिन में काँच के चेम्बर (कक्ष) में ट्यूब (Cathode Ray Tube या CRT) होती है।
उसी प्रकार काँच के निर्वातित (वायुरहित) कक्ष में उचित इलेक्ट्रोड्स लगाकर डायोड, ट्रायोड, टेट्रोड आदि बनाये जाते हैं।

एक ही कम्प्यूटर में इस प्रकार के कई वाल्वों (Vacuum Tubes) की आवश्यकता होती थी। इन नलिकाओं या वाल्वों के बड़े आकार, काँच का नाजुक चेम्बर, अति उच्च लागत, उच्च प्रारंभिक वोल्टता जो इनके प्रचालन (Operation या Functioning) के लिए आवश्यक थी, के कारण इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स आकार में विशाल, नाजुक, बहुत अधिक महंगे व अधिक ऊर्जा (विद्युत) शक्ति का उपयोग करने वाली मशीनें थी।

2. द्वितीय पीढ़ी (Second Generation of Computer) 1955-64 :

अर्धचालकों के ज्ञान के विकास के साथ, 1947 में बैल लेबोरेटरी (USA) के विलियम शॉकली ने ‘ट्रांजिस्टर’ (अर्धचालक युक्ति, PNP या NPN) का विकास किया।
(सामान्यतया घरों में इस्तेमाल होने वाले रेडियो व मिनी रेडियो को भी हम आम बोलचाल में ट्रांजिस्टर बोलते हैं, परन्तु यहाँ जिस अर्धचालक युक्ति ‘ट्रांजिस्टर’ की बात कर रहे हैं वो बाजरे के दाने के आकार के लगभग बराबर,ठोस तथा अर्धचालकों (P या N) की तीन सतहों P-N-P या N-P-N से बने होते हैं।)

वैक्यूट ट्यून्स (Vacuum Tubes) की तुलना में ट्राजिस्टर, छोटे (बहुत कम आकार के.), भरोयेभन्द, कम नाजुक तथा बहुत थोड़ी-सी विद्युत शक्ति से ही काम करने वाले होने के कारण अधिक उपयोगी सिद्ध हुए।

ट्रांजिस्टर का कार्य वैक्यूम ट्यूब के समान था लेकिन इसकी कार्य करने की क्षमता एवं गति अधिक थी तथा यह आकार में छोटा व अधिक विश्वसनीय था। ट्रांजिस्टर लगातार विद्युत के संवहन से कम गरम होता था और विद्युत की खपत भी कम होती थी।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में इनपुट एवं आउटपुट के उपकरण अधिक सुविधाजनक थे। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में IBM-1401, 1BM 1602, IBM 7094, CDC 3600 UNIVAC 110) आदि प्रमुख थे।

3. तृतीय पीढ़ी (Third Generation of Computer) 1965-70 :-

इलेक्ट्रोनिक्स तकनीकी के क्षेत्र में विकास के साथ एक छोटी सी अर्धचालक (सिलिकॉन ) की चिप (लगभग 3 मि का पतला सा छोटा टुकड़ा जैसे मोबाइल में सिम पर चमकीले परिपथ) बनाना सम्भव हो गया। जिसमें सैकड़ो ट्रांजिस्टर ( ट्रेक) एक साथ होते हैं। इस नई तकनीकी को एकीकृत परिपथ या इन्टीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit या संक्षेप में ।

तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों के आन्तरिक परिपथ में मुख्य इलेक्ट्रॉनिक तार्किक भाग के रूप में IC (Integrate Circuit) लगाया जाता था, जिसे सन् 1958 में जैक किल्ली द्वारा जर्मेनियम चिप का प्रयोग कर विकसित किया गया। इस हेतु किल्ची को वर्ष 2000 का फिजिक्स का नोबल पुरस्कार दिया गया। किल्बी के आविष्कार के कुछ माह बाद ही रॉब नोयस ने सिलीकॉन चिप से और अधिक उन्नत IC का निर्माण किया।

IC को अर्धचालक पदार्थ के धात्विक ऑक्साइड (Mete Oxide Semiconductor) का प्रयोग कर बनाया गया था।

4. चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation of Computer) 1975-1995 :-

प्रारम्भ में एक एकीकृत परिपथ (IC) चिप पर लगभग 10-20 ट्रांजिस्टर ही एकीकृत होते थे। इस तकनीकी को लघु परास एकीकृत परिपथ (Small Scale Integrated Circuit या SSI) के नाम से जाना जाता था। इसके बाद तकनीकी के विकास के फलस्वरुप यह सम्भव हो पाया कि सिलिकॉन की एक छोटी सी चिप पर लगभग 100 ट्रांजिस्टर आ सकते थे। इस तकनीको, को मध्यम परास एकीकृत परिपथ (Medium Scale Integrated Circuits या MSI) के नाम से जाना गया।

5. पांचवी पीढ़ी (Fifth Generation of Computer) 1995 :-

वर्तमान में कम्प्यूटर्स की पाँचवीं पीढ़ी चल रही है। इसमें अल्ट्रा लार्ज स्केल IC (ULSIC) का प्रयोग प्रारंभ हुआ। इनमें वैज्ञानिक और अधिक तर्कशक्ति व सोचने समझने की क्षमता विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। वे प्रयास कर रहे हैं कि ऐसे कम्प्यूटर का निर्माण हो सके जिसमें उच्च तकनीकी क्षमता के साथ-साथ तर्कशक्ति (Logic तथा Reasoning) व निर्णय लेने की क्षमता भी हो, जिसमें सोचने-समझने की क्षमता व स्वयं की बुद्धिमानी (Artificial Intelligence) तथा संवेग (Emotions) भी हों। वास्तव में इस कल्पना को वैज्ञानिक साकार करने में लगे है।

कंप्यूटर की विशेषताएं क्या है (Characteristics of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का उपयोग करना दैनिक जीवन को और भी सुगम बना सकता हैं। कंप्यूटर के द्वारा बहुत से ऐसे मुश्किल या जटिल कार्य करवाए जा सकते हैं जो मानव द्वारा दक्षता के साथ नहीं किए जा सकते हैं।

तो आइए जानते कंप्यूटर की विशेषताएं क्या हैं (Characteristics of Computer in Hindi) जो कंप्यूटर को इतना शक्तिशाली बनाती हैं।

1. स्वचालन (Automation) :-

कम्प्यूटर समस्त गणना कार्य एवं डाटा प्रोसेसिंग कार्य स्वयं ऑटोमैटिक रूप से करता है। इसमें व्यक्ति द्वारा एक बार डाटा प्रविष्ट करके निर्देश देने के बाद यह शेष समस्त कार्य स्वतः ही करता है। अतः कम्प्यूटर द्वारा कार्य संपन्न करने में व्यक्तियों की आवश्यकता न्यूनतम रहती है।

यह, इसके प्रयोगकर्ता (operator) द्वारा संग्रहित प्रोग्राम या निर्देशों के अनुसार प्रक्रियांकन कर निर्देशों के अनुरूप ही परिणाम या आउटपुट प्रदान करता है। अतः यह प्रक्रिया के दौरान प्रयोगकर्ता के नियंत्रण के बिना स्वतः क्रियाशील रहता है और हमारे इच्छित परिणाम प्रदान करता है। अत: कम्प्यूटर में स्वचालन का गुण होता है।

2. गति (Speed):-

कम्प्यूटर्स का सबसे प्रथम, सबसे महत्त्वपूर्ण व सबसे बड़ा गुण गणना करने की उसकी तीव्र गति ही है। कम्प्यूटर्स बिना त्रुटि किए आश्चर्यजनक उच्च गति (Speed) से कार्य सम्पादित करते हैं। जो कार्य सामान्य व्यक्ति द्वारा कई घण्टों में पूर्ण किया जाता है वही कार्य कम्प्यूटर द्वारा एक सेकण्ड के भी अतिसूक्ष्म भाग में सम्पन्न हो जाता है। कम्प्यूटर्स की गति को मिली सेकण्ड (10-3 सेकण्ड), माइक्रोसेकण्ड ( 10 सेकण्ड) व नेनो सेकण्ड (10 सेकण्ड) के पदों में मापा जाता है।

एक शक्तिशाली कम्प्यूटर बिलियन गणनाएँ सैकण्डों में पूर्ण कर लेते हैं। इसके अलावा कम्प्यूटर रात-दिन काम करते रहने के बावजूद थकता नहीं है। इसे आराम की आवश्यकता नहीं रहती।

3. परिशुद्धता (Accuracy):-

कंप्यूटर अपने कार्य को अत्यधिक परिशुद्धता के साथ व बिना त्रुटि के पूर्ण करता है। यह समको या आंकड़ों ( डेटा) को प्रक्रिया में गुजारने (Processing) में कोई त्रुटि नहीं करता है। यह केवल गलत आँकड़े निवेश (Input) करने पर या गलत निर्देश देने पर ही त्रुटिपूर्ण सूचनाएँ या परिणाम प्रेषित करता है।

विश्वसनीयता (Reliability) :

कंप्यूटर की स्मरणशक्ति व शुद्धता अत्यधिक उच्च स्तर की होती है, जिस कारण कंप्यूटर में या इससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएँ विश्वसनीय होती हैं। कंप्यूटर में सुरक्षित आँकड़े एवं सूचनाएँ हम किसी भी अवधि के बाद पुन: उससे प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार कंप्यूटर्स, मानव से भी अधिक विश्वसनीय है क्योंकि ये मानव की तरह बार-बार दोहराने (Repetitive task) से कभी बोर होकर थकते नहीं हैं।

उच्च भण्डारण क्षमता (High Storage Capacity):

कंप्यूटर बड़ी मात्रा में समंकों (data) का भण्डारण कर सकता है। यह बहुत सारे दस्तावेजों (documents), लेखों (artickes), चित्रों (Pictures), फिल्मों (Films), गानों (Songs), प्रोग्रामों (Programmes) आदि का लंबे समय तक अपनी स्मृति में भण्डारण कर सकता है जो आवश्यकता पड़ने पर कभी भी उपयोग में लिए जा सकते हैं। दूसरी ओर मानव अपनी स्मृति में कुछ ही सूचनाओं को संकलित कर (संजोकर) रख पाता है अधिकतर सूचनाओं को भूल जाता है। इसके अलावा सूचनाओं व आँकड़ों के संग्रहण हेतु कंप्यूटर के साथ बाह्य संग्रहण डिवाइसेज होते हैं जिनमें हम कितने ही आँकड़े संग्रहित कर सकते हैं।

बहुआयामी या सार्वभौमिक उपयोगिता (Versatile) :

कंप्यूटर कई प्रकार के कार्य सम्पन्न कर सकता है। एक साथ भी इससे कई कार्य किए जा सकते हैं। इस पर किसी टेक्स्ट (text) की टाइपिंग के दौरान या इस पर गेम खेलने के दौरान गाने सुने जा सकते हैं। किसी पेकेज पर कार्य के दौरान, गणना करना, चित्र बनाना, ग्राफ बनाना, नेट को सर्फ करना, ई-मेल करना आदि कार्य सम्पन्न किए जा सकते हैं। इस प्रकार कंप्यूटर अब मानव जीवन के अधिकांश कार्यों में व्यापक रूप से प्रयुक्त किया जाने लगा है। अब इसका प्रयोग शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग, वैज्ञानिक, खगोलशास्त्र, अंतरिक्ष अनुसंधान, बैंकिंग एवं वित्त, यातायात, खेलकूद, ज्योतिष, साहित्य एवं प्रकाशन आदि सभी क्षेत्रों में किया जाने लगा है।

मानव शक्ति की आवश्यकता में कमी (Reduction in Manpower):

पहले औद्योगिक इकाइयों और कारखानों में कार्य के लिए बड़ी संख्या में व्यक्तियों की आवश्यकता होती थी। कंप्यूटर के उपयोग में लाने के बाद इन संस्थानों में वही कार्य, बिना त्रुटि के व अधिक परिशुद्धता के साथ केवल कुछ ही व्यक्तियों की मदद से पूर्ण कर लिया जाता है। कंप्यूटर के आविष्कार व उपयोग ने मानव शक्ति की आवश्यकता को कम कर दिया है।

कागजी कार्य में कमी (Reduction in Paper Work):

कंप्यूटर के उपयोग ने संस्थानों में कागजी कार्य को काफी कम कर दिया है। हाल ही में भारतीय रेल की ई-टिकिट बुकिंग में टिकिट का प्रिन्ट आउट (हार्ड कॉपी) लेकर यात्रा करने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। जिससे A4 साइज के लगभग 3 लाख कागजों की दैनिक बचत सकेगी। कार्यालयों में भी कंप्यूटर के उपयोग से कागजी-कार्य में अत्यधिक कमी आई हैं। बैंको में कागजी कार्य को काफी हद तक कम कर दिया गया है।

स्मृति में स्थित डाटा तीव्रता से खोजकर प्रस्तुत करने की क्षमता (Power of Recall):

एक व्यक्ति अपने जीवन में असंख्य गतिविधियाँ सम्पन्न करता है और वह केवल महत्त्वपूर्ण बातों और गतिविधियों को ही ध्यान में रखता है। लेकिन कंप्यूटर इसकी स्मृति में स्थित सभी बातें, चाहे वह महत्त्वपूर्ण हों या न हों, आवश्यकता पड़ने पर समान रूप से प्रयुक्तकर्ता को उपलब्ध कराता है तथा यह सूचना बहुत वर्षों के बाद भी उतनी ही शुद्ध रहती है जितनी कि यह संगृहीत करते समय थी।

स्फूर्ति

यह एक मशीन है इसलिए आप यहां कितने घंटे काम करते है या कितना काम करते है इससे कोई भी फर्क नही पड़ता है. मतलब की आप इस पर बिना रुकावट के अपने कार्य को लगातार कर सकते है और हर बार आपको एक ही पारकर का आउटपुट मिलता है.

इंसानी फितरत होती है की वो जब एक ही कार्य को लगातार करते हैं तो बोर हो जाते हैं और उसके बाद गलती होने की सम्भावना बढ़ जाती है यानि की आउटपुट में प्रभाव पड़ता है और रिजल्ट भी ख़राब होने लगता है.

कंप्यूटर की सीमाएँ क्या है ( Limitations of Computers in Hindi)

  • कंप्यूटर केवल निर्देशों के अनुसार कार्य करता है। इसमें स्वयं का कोई विवेक एवं सोचने-समझने की क्षमता नहीं होती अत: यह स्वयं कोई निर्णय नहीं लेता।
  • प्रायः वातानुकूलित वातावरण में अधिक कार्यकुशलता से कार्य करता है। अधिक तापक्रम वाले वातावारण मे इसकी कार्य-प्रणाली प्रभावित होती है।
  • कंप्यूटर में इस्तेमाल भाषा व साफ्टवेयर की सीमाएँ इसके उपयोग को कठिन बनाती है।
  • काफी लोगों के आर्थिक स्तर से इसकी अधिक कीमत होना इसके उपयोग से सीमित करता है।
  • त्रुटि सुधार क्षमता का अभावः कंप्यूटर में स्वयं त्रुटि सुधार क्षमता का अभाव होता है।
    अतः जब तक इसका प्रयोगकर्ता इसे सही निर्देश नहीं दे तब तक यह स्वयं के स्तर पर सही परिणाम नहीं दे सकता।
    अत: यदि इसे मूलतः कोई निर्देश गलत दे दिया गया हो यह स्वयं के स्तर पर उसमें
    कोई सुधार नहीं कर सकता तथा उसी गलत निर्देश या इनपुट के आधार पर ही परिणाम देगा।
  • समय के साथ अप्रचलनः कंप्यूटर नवीनतम तकनीकी पर आधारित होता है।
    चूंकि तकनीकी में नित नए अनुसंधान हो रहे हैं तथा इसमें उत्तरोत्तर नये उन्नत कंप्यूटरों का विकास हो रहा है।
    इसमें प्रयुक्त विभिन्न उपकरणों में समय के साथ तीव्र गति से सुधार हो रहे हैं।
    फलस्वरूप एक छोटे समय में ही पूर्व में क्रय किये गये कंप्यूटर व प्रोग्राम पुराने हो जाते हैं, फलतः पुनः नये उपकरण व प्रोग्राम क्रय करने पड़ते हैं जो व्यक्ति पर आर्थिक बोझ होता है। ,
  • विद्युत पर निर्भरता (Dependence on electricity) – कंप्‍यूटर को काम करने के लिये विद्युत ( electricity) की आवश्‍यकता होती है बिना विद्युत ( electricity) केे कंप्‍यूटर एक धातु के डब्‍बे से ज्‍यादा और कुुछ नहीं है
  • अपग्रेड और अपडेट (Upgrade and Update) – कम्प्यूटर एक ऐसी मशीन है जिसे समय समय पर अपग्रेड और अपडेट (Upgrade and Update) करना होता है यदि ऐसा नहीं किया तो कंप्‍यूटर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाता है 
  • वायरस से खतरा (Virus threat) – कंप्‍यूटर को हमेशा वायरस का खतरा बना रहता है, एक बार वायरस आने पर यह कंप्‍यूटर ऑपरेटिंग सिस्‍टम के साथ उसमें सुरक्षित फाइलों को भी नुकसान पहॅुचा सकता है

कंप्यूटर के उपयोग/ प्रयोग (usage of Computer In Hindi)

शिक्षा (Education):

मल्टीमीडिया (Multimedia) के विकास और कंप्यूटर आधारित शिक्षा ने इसे विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बना दिया है। डिजिटल लाइब्रेरी ने पुस्तकों की सर्वसुलभता सुनिश्चित की है।

वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research):-

विज्ञान के अनेक जटिल रहस्यों को सुलझाने में कंप्यूटर की सहायता ली जा रही है। कंप्यूटर के माध्यम से परिस्थितियों का उचित आकलन भी संभव हो पाता है। आज सभी प्रकार के वैज्ञानिक अनुसंधानों में कंप्यूटर का प्रयोग अवश्म्भावी हो गया है।

रेलवे और वायुयान आरक्षण (Railway & Airlines Reservation):

कंप्यूटर की सहायता से किसी भी स्थान से अन्य स्थानों के रेलवे और वायुयान के टिकट लिए जा सकते हैं तथा इसमें गलती की संभावना भी नगण्य है। आरक्षण की वर्तमान स्थिति की जानकारी इन्टरनेट के माध्यम से कहीं भी किसी भी समय प्राप्त की जा सकती है।

बैंक (Bank):

कंप्यूटर के अनुप्रयोग ने बैंकिंग क्षेत्र में क्रांति ला दी है। एटीएम तथा ऑनलाइन बैंकिंग, चेक के भुगतान, रुपया गिनना तथा पासबुक एंट्री में कंप्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है।

चिकित्सा (Medicine):

शरीर के अंदर के रोगों का पता लगाने, उनका विश्लेषण और निदान में कंप्यूटर का विस्तृत प्रयोग हो रहा है। सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे तथा विभिन्न जाँच कार्यों में कंप्यूटर का प्रयोग अवश्यंभावी हो गया है।

रक्षा (Defence):

रक्षा अनुसंधान, वायुयान नियंत्रण, मिसाइल, राडार आदि में कंप्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology): कंप्यूटर की तीव्र गणना क्षमता के कारण ही ग्रहों, उपग्रहों और अंतरिक्ष की घटनाओं का सूक्ष्म अध्ययन किया जा सकता है। कृत्रिम उपग्रहों में भी कंप्यूटर का विशेष प्रयोग हो रहा है।

संचार (Communication):

आधुनिक संचार व्यवस्था कंप्यूटर के प्रयोग के बिना संभव इंटरनेट ने संचार क्रांति को जन्म दिया है। तंतु प्रकाशिकी संचरण (Fiberoptics Communication) में कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है। कंप्यूटर की मदद से ही पृथ्वी पर बैठे-बैठे अंतरिक्ष में छोड़े गये रॉकेट, मिसाइल आदि पर पर्याप्त नियंत्रण रखा जा सकता है।

उद्योग व व्यापार (Industry & Business):

उद्योगों में कंप्यूटर के प्रयोग से बेहतर गुणवत्ता वाली वस्तुओं का उत्पादन संभव हो पाया है। व्यापार में कार्यों और स्टॉक का लेखा-जोखा रखने में कंप्यूटर सहयोगी सिद्ध हुआ है।

मनोरंजन (Recreation):

सिनेमा, टेलीविजन के कार्यक्रम, वीडियो गेम आदि में कंप्यूटर का उपयोग कर प्रभावी

मनोरंजन प्रस्तुत किया जा रहा है। मल्टीमीडिया के प्रयोग ने कंप्यूटर को मनोरंजन का उत्तम साधन बना दिया है।

प्रशासन (Administration): प्रशासन में पारदर्शिता लाने, सरकार के कार्यों को जनता तक पहुँचाने तथा विभिन्न प्रशासनिक तंत्रों में बेहतर तालमेल के लिए ई-प्रशासन (E-Governance) का उपयोग कंप्यूटर की सहायता से ही संभव हो पाया है।

डिजिटल पुस्तकालय (Digital Library):

पुस्तकों को अंकीय स्वरूप प्रदान कर उन्हें अत्यंत कम स्थान में अधिक समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। इसे इंटरनेट से जोड़ देने पर किसी भी स्थान से पुस्तकालय में संगृहीत सूचना को प्राप्त किया जा सकता है। आजकल शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा, जिसमें कंप्यूटर का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। पर्यावरण, पुस्तकालय, यातायात, पुलिस प्रशासन, मौसम विज्ञान, संगीत, चित्रकला ज्योतिष, इंजीनियरिंग डिजाइन आदि अनेक क्षेत्रों में कंप्यूटर का प्रयोग किया जा रहा है।

कंप्यूटर वायरस (Computer Virus)

कंप्यूटर वायरस एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम होता है जो स्वयं की नकल कर सकता है और एक कंप्यूटर को संक्रमित कर सकता है। यह कंप्यूटर की फाइल प्रणाली व आँकड़ों को नष्ट कर देता है। कंप्यूटर वायरस शीघ्रता से एक से अधिक कंप्यूटर में फैल जाता है।

FLOPs- Floating-Point Operations Per second : सुपर कंप्यूटर की कार्यक्षमता मापने का पैमाना।

MIPs- Million Instructions Per second : एक साधारण कंप्यूटर की कार्यक्षमता के मापन का पैमाना।

कंप्यूटर हार्डवेयर (Hardware):

कम्प्यूटर और उससे संलग्न सभी यंत्रों और उपकरणों को हार्डवेयर कहा जाता है। इसके अन्तर्गत केन्द्रीय संसाधन एकक, आंतरिक स्मृति, बाह्य स्मृति, निवेश एवं निर्गम एकक आदि आते हैं।

Computer सॉफ्टवेयर (Software) :-

कम्प्यूटर के संचालन के लिए निर्मित Program को सॉफ्टवेयर कहा जाता है।

Computer Language (कंप्यूटर भाषा)

हर देश तथा राज्य की अपनी अपनी भाषा होती हैं और इसी भाषा के कारण लोग एक दूसरे की बातो को समझ पाते है| ठीक उसी प्रकार कंप्यूटर की भी अपनी भाषा होती है जिसे कंप्यूटर समझता है गणनाये करता है और परिणाम देता है| प्रोग्रामिंग भाषा कंप्यूटर की भाषा है जिसे कंप्यूटर के विद्वानों ने कंप्यूटर पर एप्लिकेशनों को विकसित करने के लिए Design किया है| पारंपरिक भाषा कि तरह ही प्रोग्रामिंग भाषाओँ के अपने व्याकरण होते है इसमें भी वर्ण, शब्द, वाक्य इत्यादि होते हैं|

प्रोग्रामिंग भाषाओ के प्रकार (Types of Programming Language)

प्रोग्रामिंग भाषा कई है | कुछ को हम समझते है तथा कुछ को केवल कम्प्यूटर ही समझता है | जिन भाषाओ को केवल कम्प्यूटर समझता है वे आमतौर पर निम्नस्तरीय भाषा (Low level Language) कहलाती है तथा जिन भाषाओ को हम समझ सकते है उन्हें उच्चस्तरीय भाषा (High level language) कहते है |

 निम्न स्तरीय भाषा (Low Level Language)

वह भाषाएँ (Languages) जो अपने संकेतो को मशीन संकेतो में बदलने के लिए किसी भी अनुवादक (Translator) को सम्मिलित नही करता, उसे निम्न स्तरीय भाषा कहते है अर्थात निम्न स्तरीय भाषा के कोड को किसी तरह से अनुवाद (Translate) करने की आवश्यकता नही होती है |

मशीन भाषा (Machine Language) तथा असेम्बली भाषा (Assembly Language) इस भाषा के दो उदाहरण है| लेकिन इनका उपयोग प्रोग्राम (Program) में करना बहुत ही कठिन है | इसका उपयोग करने के लिए कम्प्यूटर के हार्डवेयर (Hardware) के विषय में गहरी जानकारी होना आवश्यक है | यह बहुत ही समय लेता है और त्रुटियों (Error) की सम्भावना अत्यधिक होती है | इनका संपादन (Execution) उच्च स्तरीय भाषा (High level language) से तेज होता है | ये दो प्रकार की होती है –

  1. मशीन भाषा (Machine Language)
  2. असेम्बली भाषा (Assembly Language)
  •  मशीन भाषा (Machine Language)

कम्प्यूटर प्रणाली (Computer System) सिर्फ अंको के संकेतो को समझाता है, जोकि बाइनरी (Binary) 1 या 0 होता है | अत: कम्प्यूटर को निर्देश सिर्फ बाइनरी कोड 1 या 0 में ही दिया जाता है और  जो निर्देश बाइनरी कोड (Binary Code) में देते है उन्हें मशीन भाषा (Machine Language) कहते है |

मशीनी भाषा (Machine Level Language) मशीन के लिए सरल होती है और प्रोग्रामर के लिए कठिन होती है | मशीन भाषा प्रोग्राम का रख रखाव भी बहुत कठिन होता है | क्योकि इसमें त्रुटीयो (Error) की संभावनाएँ अधिक होती है | Machine Language प्रत्येक Computer System पर अलग-अलग कार्य करती है, इसलिए एक कंप्यूटर के कोड दूसरे कंप्यूटर पर नही चल सकते|

  • असेम्बली भाषा (Assembly Language)

असेम्बली भाषा में निर्देश अंग्रेजी के शब्दों के रूप में दिए जाते है, जैसे की NOV, ADD, SUB आदि, इसे mnemonic code” (निमोनिक कोड) कहते है | मशीन भाषा की तुलना में असेम्बली भाषा को समझना सरल होता है लेकीन जैसा की हम जानते है की कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (Electronic Device) है

और यह सिर्फ बाइनरी कोड (Binary Code) को समझता है, इसलिए जो प्रोग्राम असेम्बली भाषा में लिखा होता है, उसे मशीन स्तरीय भाषा (Machine level language) में अनुवाद (Translate) करना होता है ऐसा Translator जो असेम्बली भाषा (Assembly language) को मशीन भाषा (Machine language) में Translate करता है, उसे असेम्बलर (Assembler) कहते है |

डाटा (Data) को कम्प्यूटर रजिस्टर में जमा किया जाता है और प्रत्येक कम्प्यूटर का अपना अलग रजिस्टर सेट होता है, इसलिए असेम्बली भाषा में लिखे प्रोग्राम सुविधाजनक नही होता है | इसका मतलब यह है कि दुसरे कम्प्यूटर प्रणाली के लिए हमें इसे फिर से अनुवाद करना पड़ता है

उच्च स्तरीय भाषा (High Level Language)

उच्च स्तरीय भाषा (High level language) सुविधाजनक होने के लक्षणों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, इसका अर्थ यह कि ये भाषा मशीन पर निर्भर करती है | यह भाषा अंग्रेजी भाषा के कोड जैसी होती है, इसलिए इसे कोड करना या समझना सरल होता है | इसके लिए एक Translator की आवश्यकता होती है, जो उच्च स्तरीय भाषा के Program को मशीन कोड में translate करता है इसके उदाहरण है – फॉरटरैन (FORTRAN), बेसिक (BASIC), कोबोल (COBOL), पास्कल (PASCAL), सी (C), सी++ (C++), जावा (JAVA), VISUAL BASIC, Visual Basic.net HTML, Sun Studio आदि इसी श्रेणी (Category) की भाषा है इसको दो generation में बाँटा गया गई|

  1. Third Generation Language
  2. Fourth Generation Language
  • तृतीय पीढ़ी भाषा (Third Generation Language)

तृतीय पीढ़ी भाषाएँ (Third Generation Language) पहली भाषाएँ थी जिन्होंने प्रोग्रामरो को मशीनी तथा असेम्बली भाषाओ में प्रोग्राम लिखने से आजाद किया| तृतीय पीढ़ी की भाषाएँ मशीन पर आश्रित नही थी इसलिए प्रोग्राम लिखने के लिए मशीन के आर्किटेक्चर को समझने की जरुरत नही थी | इसके अतिरिक्त प्रोग्राम पोर्टेबल हो गए, जिस कारण प्रोग्राम को उनके कम्पाइलर व इन्टरप्रेटर के साथ एक कम्प्यूटर से दुसरे कम्प्यूटर में कॉपी किया जा सकता था| तृतीय पीढ़ी के कुछ अत्यधिक लोकप्रिय भाषाओ में फॉरटरैन (FORTRAN), बेसिक (BASIC), कोबोल (COBOL), पास्कल (PASCAL), सी (C), सी++ (C++) आदि सम्मिलित है |

  • चतुर्थ पीढ़ी भाषा (Fourth Generation Language)

Forth Generation Language, तृतीय पीढ़ी के भाषा से उपयोग करने में अधिक सरल है | सामान्यत: चतुर्थ पीढ़ी की भषाओ में विजुअल (Visual) वातावरण होता है जबकि तृतीय पीढ़ी की भाषाओ में टेक्सचुअल (Textual) वातावरण होता था | टेक्सचुअल वातावरण में प्रोग्रामर Source Code को निर्मित करने के लिए अंग्रेजी के शब्दों का उपयोग करते है |

चतुर्थ पीढ़ी की भाषाओ के एक पंक्ति का कथन तृतीय पीढ़ी के 8 पंक्तियों के कथन के बराबर होता है | विजुअल वातावरण में, प्रोग्रामर बटन, लेबल तथा टेक्स्ट बॉक्सो  जैसे आइटमो को ड्रैग एवं ड्रॉप करने के लिए टूलबार का उपयोग करते है| इसकी विशेषता IDE (Integrated development Environment) हैं जिनके Application Compiler तथा run time को Support करते है| Microsoft Visual studio and Java Studio इसके दो उदाहरण है|


कंप्यूटर के कार्य

कम्प्यूटर के प्रमुख तकनीकी कार्य चार प्रकार के -1. आंकड़ों का संकलन या निवेशन, 2. आंकड़ों का संचयन, आंकड़ों का संसाधन और 4. आंकड़ों या प्राप्त जानकारी का निर्गमन पुनर्निर्गमन । आंकड़े लिखित, मुद्रित, श्रव्य, दृश्य रेखांकित या शंत्रिक चेष्टाओं के रूप में हो सकते हैं।

1.  इनपुट (Input) :-  कंप्यूटर में डाटा तथा अनुदेशों को डालने का कार्य इनपुट कहलाता है।

2. भंडारण (Storage) :- डाटा तथा अनुदेशों को मेमोरी यूनिट में स्टोर किया जाता है ताकि आवश्यकता अनुसार उनका उपयोग किया जा सके।

3. प्रोसेसिंग (Processing) :-  इनपुट द्वारा प्राप्त डाटा पर अनुदेशों के अनुसार अंकगणितीय व तार्किक गणनाएं कर उसे सूचना में बदला जाता है।

4. आउटपुट :- कंप्यूटर द्वारा प्रोसेसिंग के पश्चात सूचना या परिणामों को उपयोगकर्ता के समक्ष प्रदर्शित करने का कार्य आउटपुट कहलाता है।

कंप्यूटर क्या है के आलावा नवीनतम सरकारी नौकरी अधिसूचना

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