छत्तीसगढ़ में मराठा काल का विस्तारपूर्वक वर्णन

  • नागपुर के भोसले वंश के शासक रघु जी के दक्षिण भारत अभियान के दौरान उनके सेनापति भास्कर पंत ने दक्षिण कोसल  पर कब्जा जमाने का प्रयास प्रारंभ किया 1741-४२ में  रतनपुर के क्षेत्र में उसने अपना प्रभुत्व स्थापित किया इस समय रतनपुर में रघुनाथ सिंह का शासन था
  • रतनपुर में प्रारंभ में मराठा प्रतिनिधि के रूप में कलचुरी शासक रघुनाथ सिंह को शासन करने दिया गया 1745 में रघुनाथ सिंह के बाद मोहन सिंह को शासक नियुक्त किया गया
  • 1798 मोहन सिंह की मृत्यु उपरांत रघु जी भोसले के पुत्र बिम्बाजी भोसले ने अपना प्रत्यक्ष शासन रतनपुर में स्थापित किया 1750 में रायपुर की कलचुरी शाखा के शासक अमर सिंह को अपदस्थ कर 1757 तक समूचे क्षेत्र में बिम्बाजी  भोसले ने अपना शासन स्थापित कर लिया
  • बिम्बाजी (1758-87 ई.) को छत्तीसगढ़ का प्रथम स्वतंत्र मराठा शासक माना जाता है इनकी एक स्वतंत्र सेना थी उसका शासन जनहितकारी था
  • बिम्बाजी के काल का विवरण यूरोपीय यात्री कॉलब्रुक ने भी दिया है
  • व्यंकोजी घोंसला (1787-1815 ई.) बिम्बाजी  के बाद व्यंकोजी को छत्तीसगढ़ का राज्य प्राप्त हुआ यहां का शासन सूबेदारों  के माध्यम से चलाने लगे जिसमें छत्तीसगढ़ में सूबेदारी  पद्धति अथवा सूबा शासन का सूत्रपात हुआ
  • महीपतराव  दिनकर छत्तीसगढ़ का पहला सूबेदार नियुक्त किया गया उसके बाद क्रमशः बिट्ठल दिनकर, भवानी कालू, केशव गोविंद आदि सूबेदार हुए यादव राव दिनकर अंतिम सूबेदार था
  • अनेक यूरोपीय यात्रियों जैसे  फॉरेस्टर, ब्लंट एवं कोलब्रूक ने छत्तीसगढ़ की यात्रा की
  • ब्रिटिश नियंत्रण कॉल (1818 से 1830)
  • तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध के दौरान 1817 में सीताबर्डी की युद्ध में मराठा पराजित हुए और 1818 की नागपुर की संधि से अंग्रेजों का अप्रत्यक्ष नियंत्रण छत्तीसगढ़ क्षेत्र में स्थापित हुआ
  • अंग्रेजों ने छत्तीसगढ़ क्षेत्र की राजधानी रतनपुर से स्थानांतरित कर रायपुर को बनाया इस काल में अंग्रेजों ने अपने रेजिडेंट  एवं अधीक्षकों के जरिए शासन संचालित किया
  • रघु जी भोंसले तृतीय का काल (1830-1853 ई.)
  • भोसले वंश के रघु जी तृतीय के वयस्क होने पर 1830 में अंग्रेजों ने छत्तीसगढ़ शासन उसे सौंप दिया जिसने1853 तक शासन किया 1853 में उसकी मृत्यु हो गई
  • रघु जी भोसले  तृतीय ने सूबेदार के स्थान पर छत्तीसगढ़ में जिलेदार के माध्यम से शासन किया प्रथम जिलेदार कृष्णा राव अप्पा एवं अंतिम जिलेदार गोपालराव थे
  • रघु जी भोसले तृतीय के समय हुए विद्रोह धमधा के गोंड़ जमींदार द्वारा विद्रोह तारापुर विद्रोह, माड़िया विद्रोह तथा बरगढ़ के जमींदार का विद्रोह
  • गवर्नर जनरल डलहौजी ने व्यपगत नीति के अंतर्गत 1854 में नागपुर का ब्रिटिश राज्य में विलय
  • नागपुर के विलय के साथ ही समस्त छत्तीसगढ़ ब्रिटिश शासन के प्रत्यक्ष प्रशासन के अधीन आ गया
  • ब्रिटिश शासन के अधीन छत्तीसगढ़
  • कैप्टन एडमंड छत्तीसगढ़ का पहला अंग्रेज अधीक्षक था एडमंड की मृत्यु के बाद इस क्षेत्र का प्रभार क्या है कर्नल एगन्यू ने लिया  वह 1818 से 1825 तक अधीक्षक रहा
  • कर्नल  एगन्यू  के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ का मुख्यालय रतनपुर से हटाकर रायपुर लाया गया
  • अंग्रेजों ने मध्य क्षेत्रों के शासन संचालन को व्यवस्थित करने हेतु 2 नवंबर अट्ठारह सौ इकसठ को सेंट्रल प्राविन्स का निर्माण किया जिसमें नागपुर क्षेत्र के अंतर्गत रायपुर बस्तर क्षेत्र भी सम्मिलित थे।
  • 1950 में बंगाल प्रांत एवं सेंट्रल प्राविन्स का पुनर्गठन किया गया जिससे सेंट्रल प्राविन्स  की सीमाओं में परिवर्तन हुआ बंगाल क्षेत्र से छोटा नागपुर के अधीन कोरिया चांगभखार, उदयपुर एवं सरगुजा क्षेत्र छत्तीसगढ़ क्षेत्र में एवं छत्तीसगढ़ संभाग के संबलपुर जिले के बामड़ा, रेडा खोल, पटना, सोनपुर एवं कालाहांडी क्षेत्र बंगाल प्रांत में मिला दिया गया।
  • यूरोपीय यात्री
  • प्रथम सूबेदार महीपत राव दिनकर के समय फॉरेस्टर नामक यूरोपीय यात्री 1790 में छत्तीसगढ़ आया था जिसने सुबा शासन के संबंध में पहली बार प्रकाश डाला।
  • दूसरे सूबेदार विट्ठल दिनकर के समय यूरोपीय यात्री कैप्टन ब्लंट 1795 ईस्वी में रतनपुर एवं रायपुर आया।
  • चौथे सूबेदार केशव गोविंद का समय का चित्रण यूरोपीय यात्री कॉल ब्रुक ने किया है उसने मराठा  शासक बिम्बाजी के काल का विवरण भी दिए हैं

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