Information about major rivers of Chhattisgarh in Hindi – छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों की जानकारी हिंदी में

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Information about major rivers of Chhattisgarh in Hindi – छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों की जानकारी हिंदी में
Information about major rivers of Chhattisgarh in Hindi

Information about major rivers of Chhattisgarh in Hindi – छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों की जानकारी हिंदी में

छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा यहां की नदियां हैं, नदियां पेयजल एवं सिंचाई के प्रमुख स्रोत है मुख्य नदियों में सहायक नदियां के  सम्मेलन से अपवाह तंत्र विकसित होता है। नदियों का अपवाह तंत्र भूमि के ढाल संरचना एवं नदी जल के विवेक पर निर्भर करता है, छत्तीसगढ़ की समग्र नदियों को पांच अपवाह तंत्र के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है –

कछारअपवाहतंत्रक्षेत्रफलप्रतिशत.
महानदी अपवाह तंत्र 77.432 56.15
गोदावरी अपवाह तंत्र39.497 28.68
गंगा अपवाह तंत्र    18.789  13.63
ब्रह्माणी अपवाह तंत्र  1.423    1.03
नर्मदा अपवाह तंत्र   0.759     0.55


इनमें नर्मदा को छोड़कर शेष सभी बंगाल की खाड़ी में मिलती है छत्तीसगढ़ का आधे से ज्यादा भाग महानदी अपवाह तंत्र का हिस्सा है, मैकल श्रेणी नर्मदा  एवं महानदी प्रवाह तंत्र को  पृथक करती हैं।

महानदी प्रवाह प्रणाली :-इस प्रवाह तंत्र की सबसे प्रमुख नदी महानदी है। महानदी एवं उसकी अन्य सहायक नदियों से मिलकर इस प्रवाह तंत्र का निर्माण हुआ है, यह छत्तीसगढ़ प्रदेश का सर्व प्रमुख प्रवाह तंत्र है जो राज्य के 56.15% जल का  संग्रहण करती है छत्तीसगढ़ का लगभग तीन चौथाई भाग महानदी अपवाह तंत्र का हिस्सा है, महानदी अपवाह क्षेत्र मुख्यता: कवर्धा, धमतरी, महासमुंद, राजनांदगांव, दुर्ग,रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर, चांपा, रायगढ़ जशपुर जिलों में है, छत्तीसगढ़ के  मैदान का ढाल पूर्व की ओर होने के कारण इस प्रणाली की सभी नदियां पूर्व की ओर बहती है।

महानदी :-महानदी का प्राचीन नाम नीलोत्पला ( सत्ययुग में),  चित्रोत्पला, कनकनंदनी एवं महानंदा था. महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा, छत्तीसगढ़ की गंगा आदि की संज्ञा दी जाती है. इसका उद्गम धमतरी के निकट से सिहावा पर्वत से हुआ. महानदी उत्तर पूर्व दिशा में बहते हुए उड़ीसा राज्य में बंगाल की खाड़ी में गिरती है।महानदी की कुल लंबाई 851कि.मी. है छत्तीसगढ़ में इसका बहाव से 286 कि.मी. है।यह नदी कांकेर, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ जिलों में बहती है।महानदी की प्रमुख सहायक नदियां  शिवनाथ, हासदो, जोक, मांड, केलो, ईब, पैरी, सूखा, बोरई, लात, आदि है।इस नदी के प्रवाह तंत्र द्वारा छत्तीसगढ़ के मैदान में जलोढ़ मिट्टी का जमाव हुआ है।

महानदी के तट पर राजिम, सिरपुर, चंद्रपुर, शिवरीनारायण आदि प्रसिद्ध पौराणिक ऐतिहासिक नगर स्थित है।राजिम में महानदी पैरी और सोडूर नदियों का संगम है, इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है।महानदी पर ही रायगढ़ जिले में  प्रदेश का सबसे लंबा पुल सूरजपुर एवं नंदीगांव के बीच है।

शिवनाथ नदी :-यह महानदी की प्रमुख सहायक नदी है शिवनाथ प्रदेश में बहने वाली सबसे लंबी नदी। राज्य में स्थित प्रवेश राजनांदगांव के अंबागढ़ तहसील के पास पहाड़ी क्षेत्र से हुआ है , वह राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, बलौदाबाजार, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर- चांपा आदि जिलों से प्रवाहित होती हुई शिवरीनारायण जांजगीर- चांपा के समीप महानदी में मिलती है।

इसकी प्रमुख सहायक नदियां तांदुला,खरखारा, अमनेर, खारून, हांफ, मनियारी, अरपा, लीलागर, जमुनिया आदि है।

हसदो नदी :-हसदो नदी का उद्गम कोरिया जिले के सोनहट क्षेत्र में रामगढ़ के कैमूर की पहाड़ियों से हुआ है।यह नदी कोरिया, कोरबा, एवं जांजगीर चांपा जिलों में बहती हुई शिवरीनारायण के निकट ग्राम केरा- सिलादेही के पास महानदी में मिल जाती है।

हसदो नदी पर कटघोरा के निकट बांगो में  प्रदेश की सबसे ऊंची मिनीमाता बांगो नामक बहु-उद्देशीयय परियोजना का निर्माण हुआ है. इस परियोजना के तहत माचाडोली में जलविद्युत संयंत्र  स्थापित है ,बांगो बांध कोरबा स्थित विद्युत संयंत्रों को जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है।अरिहंन ,चोरनाई, झिंक,उतेम,गज,इसकी सहायक नदियां है।

मनियारी नदी :-यह लोरमी पठार की सिहावल से निकलती है यह नदी मुंगेली बिलासपुर जिले से बहते हुए ताला गांव के निकट शिवनाथ नदी में मिल जाती है इस पर खारंग- मनियारी जलाशय का निर्माण किया गया है।

अरपा नदी :-अरपा नदी बिलासपुर – पेंड्रा के पठार के खोडरी खोंगसरा के पास से निकलती. है यह बिलासपुर में प्रवाहित होते हुए मानिकचौरी के पास शिवनाथ में मिल जाती है, खारंग अरपा की सहायक नदी है।

तांदुला नदी :-सेना के प्रमुख सहायक नदी, इसका उद्गम भानूप्रतापपुर (कांकेर)  के उत्तर की पहाड़ियों से हुआ है इसका प्रभाव क्षेत्र कांकेर, बालोद, दुर्ग जिला है।

खारून नदी :- खारुन नदी का उद्गम बालोद जिले के दक्षिण- पूर्व में स्थित पेटेचुआ पहाड़ी से हुआ है, उत्तर की ओर बह कर सिमगा के निकट सोमनाथ नामक स्थान पर श्रीनाथ में मिल जाता है या नदी  दुर्ग, बालोद, बेमेतरा कामा बलोदाबाजार, रायपुर जिले में बहती है. यह शिवनाथ की सहायक नदी है।

लीलागर नदी :-लीलाधर नदी का उद्गम कोरबा की पूरी पहाड़ी से होता है, यह नदी  शिवनाथ में मिल जाती है यह नदी कोरबा, बिलासपुर, जांजगीर जिले में बहती है।

पैरी नदी :-पैरी नदी का उद्गम स्थल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ के समीप (भातृगढ़) पहाड़ियॉ है. पैरी महानदी की सहायक नदी है जो राजीम में महानदी में मिलती है इसकी सहायक नदी सोंढूर है।

मांड नदी :- मांडनदी सरगुजा जिले के मैनपार्ट से निकलती है यह नदी धार्मिक स्थल चंद्रपुर (जि. जांजगीर-चांपा )के निकट महानदी में मिल जाती है इसका प्रवाह क्षेत्र सरगुजा रायगढ़ जिला है।कुरकुट और कोई राज इसकी सहायक नदियां है।

जोंक :-उड़ीसा की तरफ से आने वाली जोक नदी खट्टी इलाके से महासमुंद में जिले में प्रवेश करती है, जोक नदी महानदी की सहायक नदी है यह महासमुंद एवं बलौदा बाजार जिले में बहते हुए शिवरीनारायण के निकट महानदी में मिलती हैं।

ईब नदी :-ईब नदी का उद्गम स्थल जशपुर के पंडरापाठ के खुर्जा पहाड़ी के रानीझूला नामक स्थान है यह नदी उड़ीसा की में हीराकुंड से 10 कि.मी. पूर्व महानदी में मिलती है.यह नदी सोने के कण प्राप्ति के लिए जानी जाती है।

केलो :-उद्गम रायगढ़ जिले की घरघोड़ा तहसील में स्थित लूंगेड़ पहाड़ी से। उड़ीसा राज्य के महादेव पाली नामक स्थान पर महानदी में विलीन यह मुख्यत: रायगढ़ जिले में बहती है।

बोरई नदी :-इस नदी का उद्गम कोरबा के निकट पहाड़ी से हुआ है। यह कोरबा,जांजगीर- चांपा जिलों में बहती हुई महानदी में मिल जाती है।

हांफ नदी :-उद्गम कवर्धा जिले के कांदावाड़ी पहाड़ी से हुआ है।यह शिवनाथ में मिल जाती है।

दूध नदी :-इसका उद्गम कांकेर के निकट मलाजकुंडम पहाड़ी से हुआ है. यह पूर्व की ओर बहते हुए महानदी में मिल जाती है

उपरोक्त नदियों के अतिरिक्त सुरंगी,  बोररा,सूखा आदि नदियां भी महानदी की सहायक नदी है।

नगर और नदी तट

नगरनदी तट
रायपुरखारुन
जगदलपुरइंद्रावती
दुर्गशिवनाथ
राजनांदगावशिवनाथ
बिलासपुरअरपा
चांपाहसदेव
कोरबाहसदेव 
रायगढ़केलो
कोंडागांवनारंगी
कोंटासबरी
दंतेवाड़ाडंकिनी शंखिनी
शिवनीनारायणमहानदी
राजिममहानदी

गोदावरी प्रवाह प्रणाली:- दक्षिण गंगा कहलाने वाली गोदावरी नदी का उद्गम नासिक महाराष्ट्र से होता है। छत्तीसगढ़ क्षेत्र का लगभग 28.64 जल गोदावरी प्रवाह तंत्र में जाता है। गोदावरी नदी छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बहते हुए दक्षिण पश्चिम सीमा बनाती है। राज्य में इंद्रावती सबरी चिंता बाघ मरी गुदरा कोभरा इस प्रणाली की नदियां हैं।

इंद्रावती नदी:- इंद्रावती गोदावरी के प्रधान सहायक तथा दंडकारण्य पठार की सबसे प्रमुख नदी है। इसे बस्तर की जीवन रेखा कहा जाता है। इसका उद्गम उड़ीसा के कालाहांडी जिले के रामपुर थुयामुल में मुंगेर पहाड़ी से हुआ है ।यह बस्तर नारायणपुर बीजापुर जिले में बहती है। बीजापुर जिले के भद्रकाली में इंद्रावती नदी और गोदावरी नदी का संगम होता है। छत्तीसगढ़ में इंद्रावती की कुल लंबाई 264 किलोमीटर है। इंद्रावती की सहायक नदियों में बोरडिग,नारंगी,गुदरा,नंदीराज,कोटरी,डंकिनी- शंखिनी प्रमुख है। भारत का नियाग्रा कहा जाने वाला सबसे चौड़ा प्रपात चित्रकूट जलप्रपात इसी नदी पर स्थित है।

कोटरी:- कोटरी इंद्रावती की सहायक नदी है यह दुर्ग उच्च भूमि से निकलकर इंद्रावती में मिलती है। यह मुख्यतः राजनांदगांव नारायणपुर जिलों में बहती है। यह परलकोट के नाम से भी जानी जाती है।

सबरी नदी:– उद्गम स्थल बैलाडीला पहाड़ी सुकमा जिले में बहते हुए यह आंध्र प्रदेश के कुनावरम के निकट गोदावरी में मिलती है। कांगेर और मालिक इस की सहायक नदियां हैं डंकिनी और संखनी नदी डंकिनी नदी का उद्गम डांगरी डूंगरी तथा शंखिनी का उद्गम बैलाडीला पहाड़ी के नंदीराज चोटी से हुआ है। दोनों नदिया दंतेवाड़ा के पास आपस में मिल जाती हैं।

बाघ नदी:- बाघ नदी राजनांदगांव जिले के कुल्हारी से निकलती है यह वैनगंगा प्रवाह तंत्र की एक शाखा है। यह नदी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा बनाती है।

नारंगी नदी:- कोंडागांव से उद्गम इंद्रावती में विलीन।

गंगा प्रवाह प्रणाली:- गंगा प्रवाह तंत्र के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के सरगुजा बिलासपुर एवं रायगढ़ जिले के क्षेत्र आते हैं। गंगा प्रवाह प्रणाली का सर्वाधिक क्षेत्र सरगुजा में है। राज्य में इस अपवाह क्षेत्र की नदियां उत्तर की ओर बहते हुए इस क्षेत्र के जल को गंगा नदी की सहायक नदी सोन तक पहुंचाती है। छत्तीसगढ़ क्षेत्र के लगभग 13.63% जल का प्रवाह इस नदी तंत्र द्वारा होता है।

सोन नदी:- प्रदेश में सोन नदी गंगा के प्रमुख सहायक नदी है। जो पेंड्रा रोड के बंजारी क्षेत्र से निकलकर पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हुई मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को पार करते हुए पटना के पास गंगा नदी में मिल जाती है कन्हार रिहंद गोपद बनास बीजाल इत्यादि इसकी की प्रमुख सहायक नदियां हैं।

कन्हार नदी:- कन्हार नदी जशपुर जिले के बखोना चोटी पहाड़ी से निकलती है। तथा जशपुर एवं बलरामपुर जिले से बहती हुई कोठरी जलप्रपात की रचना करते हुए सोन नदी में मिल जाती है।

रिहंद नदी:- रिहंद नदी का उद्गम अंबिकापुर तहसील के मतिरिंगा पहाड़ी से हुआ है। यह उत्तर प्रदेश में सोन नदी में विलीन हो जाती है इस पर उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर क्षेत्र में रिहंद बांध बनाया गया है। रिहंद नदी को सरगुजा की जीवन रेखा कहा जाता है। यह छत्तीसगढ़ में गंगा अपवाह क्रम की सबसे लंबी 145 किलोमीटर नदी है। इस की सहायक नदियां घुनघुट्टा मोरनी महान सूर्या गोबरी आदि है ।

ब्रह्माणी  प्रवाह प्रणाली:- इसके कछार ने प्रदेश का 1.03% हिस्सा आता है जसपुर जिले में छत्तीसगढ़ एवं झारखंड की कुछ सीमा बनाने वाली शंख नदी एवं झारखंड के दक्षिण कोयल नदी से मिलकर यह नदी बनती है।

नर्मदा प्रवाह प्रणाली:-यह प्रदेश के सबसे छोटी प्रवाह प्रणाली है। नर्मदा प्रवाह तंत्र के द्वारा छत्तीसगढ़ क्षेत्र के लगभग 0.55% जल का संग्रह होता है। कवर्धा जिले में बहने वाली बंजर टांडा नदियां इस तंत्र के अंतर्गत आते हैं।

महानदी अपवाह

नदीउद्गम स्थललंबाई कि.मी.सहायक नदीप्रवाह क्षेत्र के जिले
महानदीधमतरी जिले के सिहावा पर्वत से286शिवनाथ हसदो पैरी सूखा जोंक  मांड, केलो ,ईब ,बोरई,लात,कांकेर, बालोद, धमतरी ,गरियाबंद, रायपुर ,महासमुंद, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़
शिवनाथशिवनाथ पानाबरस पहाड़ी अंबागढ़ जिला राजनांदगांव से प्रवेश290तांदुला,अमनेर,खारून,हांफ ,मनियारी,अरपा,लीलागर राजनांदगांव, दुर्ग बेमेतरा, बलौदा बाजार, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर चांपा
हसदोकोरिया जिले के सोनहत तहसील की कैमूर पहाड़ी176अहिरन ,चोरनेयी, झिंक, उतम, गजकोरिया , बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर चांपा
ईबपण्डरापाट की खुरजा  पहाड़ी जिला जशपुर87————————-पण्डरापाट की खुरजा  पहाड़ी जिला जशपुर
मनियारीलोरमी क्षेत्र मुंगेली134आगर, छोटी,टेसुवा,  घोघा नर्मदामुंगेली, बिलासपुर
अरपाखोडरी खोंगसरा पहाड़ी पेंड्रा100खारंगबिलासपुर
खारुनसंजारी जिला बालोद————–———————-बालोद दुर्ग रायपुर बेमेतरा
जोंकमहासमुंद जिले में प्रवेश—————-——————–महासमुंद ,बलोदाबाजार,
पैरीगरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ के निकट भाटीगढ़ी पहाड़ी सेसोंढूर ————————गरियाबंद,धमतरी महासमुंद
केलोलुड़ेग पहाड़ी से—————कोलेडेगा,राजररायगढ़
मांडमैनपाट पठार जिला सरगुजा155—————–सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा

गोदावरी अपवाह  

नदीउद्गम स्थललंबाई कि.मी.सहायक नदीप्रवाह क्षेत्र के जिले
इंद्रावतीउड़ीसा के कालाहांडी जिले264बोरडिग,नारंगी,गुदरा,नंदीराज,कोटरी,डंकिनी- शंखिनी प्रमुख हैबस्तर,नारायणपुर बीजापुर
सबरी नदीउद्गम स्थल बैलाडीला पहाड़ी सुकमा जिले में173कांगेर ,मालेंगरसुकमा

गंगा अपवाह

नदीउद्गम स्थललंबाई कि.मी.सहायक नदीप्रवाह क्षेत्र के जिले
रिहंदअंबिकापुर तहसील के मतिरिंगा पहाड़ी145घुनघुट्टा मोरनी महान सूर्या गोबरीसरगुजा, सूरजपुर
कन्हारजशपुर जिले के बखोना चोटी पहाड़ी से115सिंदूर गलफुला पेगनजशपुर, बलरामपुर

ब्राह्मणी अपवाह

नदीउद्गम स्थललंबाई कि.मी.सहायक नदीप्रवाह क्षेत्र के जिले
शंख——————————————जशपुर,

नर्मदा अपवाह

नदीउद्गम स्थललंबाई कि.मी.सहायक नदीप्रवाह क्षेत्र के जिले
बंजरउत्तरी कवर्धाकवर्धा
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