छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी नृत्य का विस्तार पूर्वक वर्णन

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छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी नृत्य – Major tribal dances of Chhattisgarh

                                           करमा नृत्य

  • करमा नृत्य करमा नृत्य छत्तीसगढ़ अंचल का सबसे पुराना नृत्य है यह नृत्य कर्म या  कर्मा देवता को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है
  • गोंड़ बैगा उरांव बिंझवार आदि जनजातियों में करमा नृत्य का व्यापक प्रचलन है
  • प्रायः यह विजयादशमी से आरंभ होकर अगली  वर्षा ऋतु के आरंभ तक चलता है इसमें प्रायः 8 पुरुष और 8 स्त्रियां नृत्य करते हैं युवक युवतियां गोलार्ध बनाकर आमने सामने नृत्य करते हैं
  • कर्मा का केंद्रीय वाद मांदर है इसमें उनकी छल्ला ठुमकी छल्ला झुमकी आदि भी बजाए जाते हैं
  • कर्मा में क्षेत्रीय भिन्नता भी दिखाई पड़ती है प्रमुख स्वरूप है थाड़ी लहकी खलहा झूमर झरपट
  • कर्मा आदि

                                        दशहरा नृत्य

  • दशहरा यह बैगा आदिवासियों का आदि नृत्य है विजयादशमी से प्रारंभ होने के कारण इस नृत्य का नाम दशहरा नृत्य पड़ा दशहरा नृत्य सैला की भांति सरल है इस नृत्य को अन्य जनजातियों नृत्य का द्वार भी कहा जाता है

                                             गौर नृत्य

  • गौर नृत्य दक्षिण बस्तर क्षेत्र में निवास करने वाली बाइसन हॉर्न माड़िया या गौर सिंगि माड़िया का प्रसिद्ध नृत्य गौर नृत्य है
  • माड़िया जनजाति जात्रा पर्व के समय यह नृत्य करती है
  • इसमें गौर के शिकार का नृत्य रूप में प्रस्तुतीकरण किए जाते हैं
  • मानव शास्त्री वेरियर एल्विन ने इस नृत्य को संसार का सबसे सुंदर नृत्य कहां है
  • इसमें युवक गौर पशु के सींग कौड़ियों से सजाकर अपने सिर पर धारण करते हैं
  • इस नृत्य में युवतियां भी भाग लेती हैं वे अपने हाथों में तिरुढ नामक छड़ी धारण करते हैं

                                                        सैला नृत्य

  • सैला नृत्य सैला का अर्थ शैल या डंडा डंडा होता है शैल शिखरों पर रहने वाले लोगों के द्वारा किए जाने के कारण इसका नाम सैला पड़ा
  • यह नृत्य दशहरे से आरंभ होकर पूरे शरद ऋतु के रातों को चलता है
  • अपने आदि देव को प्रसन्न करने हेतु सैला नृत्य का आयोजन होता है गोंड़ बैगा परधान जनजातियों में प्रचलित है
  • यह नृत्य स्त्री एवं पुरुष दोनों द्वारा किया जाता है इसका पूरा नाम सैला रीना है
  • इसमें नर्तक हाथों में डंडा लेकर नृत्य करते हैं
  • इस अवसर पर दोहे भी बोले जाते हैं इसे डंडा नाच भी कहा जाता है मांदर इस नृत्य का प्रमुख वाद्य है
  • सैला में क्षेत्रीय विविधता व विभिन्नता भेद पाए जाते हैं जैसे बैठकी सैला आरती सैला शिकारी सैला ढाढ़ी सैला आदि

                                                    सरहुल नृत्य

  • सरहुल सरहुल उरांव जनजाति का अनुष्ठान नृत्य है उरांव सरना नामक देवी का निवास सरई वृक्ष साल में मानते हैं एवं प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा पर साल वृक्ष की पूजा का आयोजन करते हैं और वृक्ष के आसपास नृत्य करते हैं
  • सरहुल एक समूह नृत्य है इसमें उराव युवक-युवती हिस्सा लेते हैं सरहुल नृत्य का प्रमुख वाद्य मांदर और झांझ है

                                                 अटारी नृत्य

  • अटारी नृत्य यह बघेलखंड के भूमिया बैगाओं का नृत्य है इसमें एक पुरुष के कंधे पर दो आदमी चढ़े होते हैं एक व्यक्ति ताली बजाते हुए भीतर बाहर आता जाता रहता है वादक पीछे में रहते हैं

                                               चंदैनी नृत्य

  • चंदैनी पुरुष पात्र विशेष वेशभूषा में नृत्य के साथ चंदैनी कथा प्रस्तुत करते हैं यह मूलतः प्रेमगाथा है

                                                      गेंड़ी नृत्य

  • गेंड़ी नृत्य घोटूल के मुड़िया युवक लकड़ी की गेंड़ी पर एक अत्यंत तीव्र गति का नृत्य करते हैं जिसे गेंड़ी नृत्य  कहा जाता है
  • इस नृत्य में केवल एक पुरुष शामिल होते हैं इस नृत्य में सर्वाधिक कौशल और संतुलन का प्रदर्शन किया जाता है

                                           एबालतोर नृत्य

  • एबालतोर नृत्य मंडई  के अवसर पर मुड़िया घोटूल के सदस्यों द्वारा किया जाने वाला नृत्य है

                                                    ककसार  नृत्य

  • ककसार  नृत्य बस्तर के अबुझमाड़िया जनजाति का मूलतः पूजा नृत्य है
  • मुड़िया गांव में वर्ष में एक बार ककसार पूजा का आयोजन किया जाता है जिसमें मुड़िया जनजाति के लोग लिंग देव को प्रसन्न करने के लिए रात भर नृत्य गायन करते हैं

                                                    मांदरी नृत्य

  • मांदरी नृत्य मुड़िया जनजाति का नृत्य है यह घोटूल का प्रमुख नृत्य है
  • युवक एवं युवतियों द्वारा किया जाता है दोनों पृथक पृथक  पंक्तियों में पृथक पृथक गोल और दो गोल घेरा बनाकर  किया जाता है
  • करताल पर नृत्य किया जाता है गीत नहीं गाया जाता चिटकुल बजाया जाता है

                                                  दमनच नृत्य

  • दमनच पहाड़ी कोरवो यह नृत्य विवाह के अवसर पर रात भर किया जाता है
  • इसमें सभी उम्र के स्त्री-पुरुष भाग लेते हैं मृदुगली ताल पर यह नृत्य किया जाता है

                                                हुलकी पाटा नृत्य

  • हुलकी पाटा नृत्य हुलकी पाटा मुड़िया जनजातियों का प्रसिद्ध नृत्य है
  • युवक-युवतियों को इस नृत्य का प्रशिक्षण घोटूल से प्राप्त होता है
  • यह नृत्य कभी भी मेले विवाह अथवा किसी अन्य अवसर पर किया जाता है

                                                थापटी  नाच

  • थापटी  नाच कोरकुओं का पारंपरिक नृत्य है जो चैत्र वैशाख में कोरकु स्त्री पुरुष द्वारा किया जाता है
  • युवकों के हाथ में एक पंछा और झांझ नामक वाद्य होता है और युवतियों के हाथों में चिटकोरा वाद्य होता है था थापटी के मुख्य वाद्य ढोल और ढोलक है

                                                 बिल्मा नृत्य

  • बिल्मा बैगा आदिवासियों का लोकप्रिय नृत्य है जो पराया शीत ऋतु में आयोजित होता है
  • इसमें स्त्री पुरुष दोनों भाग लेते हैं वह युवक युवतियां टोलियां बनाकर परस्पर एक दूसरे के गांव में जाकर बिल्मा नाच करते हैं

                                              परधौनी नृत्य       

  • परधौनी यह बैगा आदिवासियों द्वारा विवाह के अवसर पर बारात अगवानी के लिए किया जाने वाला लोक नृत्य है
  • इस नृत्य में वर पक्ष की ओर से एक हाथी बनाकर नचाया जाता है यह एक अनुष्ठान के रूप में होता है पर ध्वनि का मुख्य वाद्य नगाड़ा और टीमकी है

                                               दोरला नृत्य

  • दोरला नृत्य बस्तर की दोरला जनजाति के द्वारा किए जाने के कारण इस नृत्य का नामकरण हुआ है दोरला जनजाति के लोग त्योहार पर नृत्य करते हैं विवाह में वे पिंदुल नृत्य करते हैं
  • इस नृत्य का वाद्य विशेष प्रकार का ढोलक है

                                      कोल-दहका नृत्य

  • कोल-दहका नृत्य यह कोल जनजाति का नृत्य है इसे कोल्हाई नृत्य भी कहा जाता है
  • यह सरगुजा के कोल  जनजातियों में प्रचलित है इस नृत्य में पुरुष गायक एवं वादक दोनों की भूमिका निभाता है महिलाएं भी गाती हैं
  • गीत सवाल-जवाब शैली में होता है पुरुषों का ढोल वादन एवं महिलाओं का नृत्य इसका आकर्षण होता है

                                            परब नृत्य

  • परब नृत्य यह बस्तर की धुरवा जनजाति का लोकप्रिय नृत्य है स्त्री पुरुष सामूहिक रूप से भाग लेते हैं
  • यह एक सैनिक नृत्य है नृत्य के साथ विशेष करतब भी किए जाते हैं जैसे पिरामिड बनाना

                                               ढाढल नृत्य

  • ढाढल नृत्य यह नृत्य कोरकू आदिवासियों द्वारा ज्येष्ठ आषाढ़ की रातों में किया जाता है नृत्य के साथ श्रृंगार गीत गाए जाते हैं और नृत्य करते समय एक दूसरे पर छोटे-छोटे डंडों से प्रहार किया जाता है
  • इस नृत्य के साथ ढोलक टीम की बांसुरी मृदंग आदि का प्रयोग होता है

                                         फाग नृत्य 

  • फाग नृत्य गोंड बैगा आदिवासी होली पर यह समूह नृत्य करते हैं इसमें एक दो व्यक्ति लकड़ी के मुखोटे और हाथ में लकड़ी की चिड़िया आदि नचा कर मनोरंजन करते हैं मांदर टिमकी  इसके प्रमुख वाद्य है

                                        तारानृत्य

  • तारानृत्य तारानृत्य एक पुत्तलिका नृत्य है पुत्तलिका को लकड़ी या घास से बनाया जाता है
  • घास की सामग्री को मानव आकृति दे दी जाती है पुतली का के सिर तथा हाथ को दिखाया जाता है पुतली का को स्त्रियों जैसे वस्त्र तथा आभूषण पहना दिए जाते हैं उसे टोकनी में लेकर चलती हुई युवतियां नृत्य अभिनय करती हैं

छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी नृत्य – Major tribal dances of Chhattisgarh के आलावा लेटेस्ट सरकारी नौकरी इस तरह से है

क्रमांकलेटेस्ट सरकारी नौकरी
1मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सरगुजा (CMHO Sarguja)भर्ती 2020:स्टाफ नर्स पदों जल्द करे आवेदन
2एमपीपीएससी भर्ती 2020 : चिकित्सा अधिकारी पदों के लिए अप्लाई करे
3भारतीय पशुपालन निगम लिमिटेड भर्ती 2020-21 प्रशिक्षण सहायक के लिए आवेदन आमंत्रित

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छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी नृत्य – Major tribal dances of Chhattisgarh के आलावा लेटेस्ट सरकारी नौकरी इस तरह से है

क्रमांकलेटेस्ट सरकारी नौकरी
1एपीडीसीएल भर्ती 2020-21 ग्रुप A व B पदों के लिए जल्द करे आवेदन
2यूपीपीसीएल जूनियर इंजीनियर भर्ती 2020 – uppcl je recruitment 2020
3PPSC Recruitment 2020 -21: कनिष्ठ अभियंता पदों के लिए जल्द करे आवेदन

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